एक टेंट, मशीन, चार होमगार्ड तैयार हो गया लुटाई केन्द्र

प्रदूषण कैम्पों का खेल
शहर पुलिस अपराधों को काबू कर पाए या न कर पाए लेकिन कोर्ट के आदेश, उच्चाधिकारियों के फरमान और जनप्रतिनिधियों की मांग को दरकिनार करते हुए प्रदूषण के नाम पर दोपहिया वाहन चालकों का उत्पीडऩ जरूर कर रही है। उन्हें भारी प्रदूषण फैला रहे टैंपुओं का, नगर बसों, लोडर व ट्रकों का काला गुबार छोड़ता धुआं नहीं दिखता बस दोपहिया वाहन चालक ही प्रदूषण फैलाते दिखते हैं । शहर भर में दोहिया वाहनों के प्रदूषण की जाँच के शिविर लगे हैं जबरन चेकिंग न करने के आदेश के बाद भी कैंप संचालक जबरन वाहन चेकिंग के नाम पर उगाही कर रहे हैं। इस काम में पुलिस के सिपाही व होमगार्डों का प्रयोग किया जा रहा है।

प्रदूषण बोर्ड निजी क्षेत्र में वाहन चेकिंग के लिए अनुमति देता है। शहर के कई लोगों ने इसके लिए लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। इसकी आड़ में वाहन चालकों का शोषण किया जाता है। सवारियों से अभद्रता आम बात है। गौरतलब है कि शासन व प्रदूषण बोर्ड जब ऐसी एजेंसी को वाहन चेकिंग का लाइसेंस देता है तो उसमें साफ निर्देश होता है कि वाहन स्वामी ऐच्छिक रूप से वाहन के प्रदूषण की जाँच कराएंगे उसके एवज में उन्हें शुल्क देना होगा कैंप से प्रदूषण मुक्त का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। लेकिन प्रमाण-पत्र देने वाले यह लोग एक टेंट में मशीन रखकर इलाकाई पुलिस व होमगार्ड के जरिए जबरन वाहनों को रूकवा कर प्रदूषण चेक करते हैं। कई बार इसको लेकर झगड़ों की नौबत तक आ चुकी है।
एस0पी0 ट्रैफिक ने भी जबरन चेकिंग न किए जाने का आदेश दिया था। पर मरे कम्पनी पुल के नीचे, सी।ओ.डी. क्रासिंग, लालबंगला, लखनऊ हाइवे, फजलगंज, रावतपुर, चुन्नीगंज, विजयनगर, जूही आदि जगहों पर अक्सर ऐसे कैम्प लगे दिखाई देते हैं। जबकि शहर में सर्वाधिक प्रदूषण सरकारी वाहन व टैम्पो फैला रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती और प्रदूषण चेकिंग के नाम पर दुपहिया वाहन चालकों से अभद्रता की जा रही है।

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