एक पाती श्री श्री १००८ - लुटेरानंद के नाम


हे अनाम, अदृश्य अनंत परमशक्तिमान जरायम शिरोमणि।
अभिवादन के लिए शब्दकोश में अलंकरण हेतु शब्द नहीं
दद्दा। अपने शहर में जो लूट की धाराबहाई वह ऐसी बही कि सारा शहर आपका मुरीद हो गया। यहां तक बदनाम, नकाबिल, परमभ्रष्ट अभद्र कही जाने वाली पुलिस भी आपके सामने नतमस्तक है। आपके प्रताप के आगे पिकेट का क्रिकेट दूर जा गिरा, एसओजी 'एस ए डी' बन गई। बडे कप्तान बेचारे माहततों की 'लूट भक्ति के सम्मोहन के जाल को तोड़ नहीं पा रहे हैं। आपके कारनामों से सारा शहर अभिभूत है। पुलिसवालों ने चिट्टियाँ भेज कर आपकी तेज तर्रारी भरे दुस्साहस के कसीदे गढे हैं। उनकी अपनी मजबूरियां हैं। बेचारों ने अपना दर्द भी बयां किया है, उम्मीद है आप गौर फरमाएंगे।


भइया लुटेरानन्द जी महाराज नमस्ते ,
आशा है आप कुशल मंगल से होगें अब तो जनता हमलोगों से आपके बीच रिश्तेदारी जोड़ रहे हैं। समझ गए होगे, मौसी के पुत्तर। अमां भाई हद कर दी आपने। बिल्कुल आफरीदी इस्टाइलं में बौलिंग हो रही है। कम से कम हमारी नौकरी का ख्याल करो। सुबह-सुबह कप्तान साहब दौड़ाते हैं, बाकी टाइम आप। हम लोगों की बहुत बदनामी हो रही है। कुछ नामुराद तो आपका पार्टनर बता रहे हैं। खामखां बदनाम हो रहें हैं। बोहनी तक को तरस रहे हैं। एक तुम हो इतने बेवफा जरा भी ख्याल नहीं कर रहे हो। जब बदनामी की चादर ओढ़ी है तो लूट की गंगा में डुबकी क्यों न लगाऊँ? कुछ दिन के लिए तुम भी भइया बाहर का विजिट कर आओ, बजट भी बढिय़ा होगा, इधर खूब कूट भी दी थी। नाक कटने की नौबत आए तो द्रौपदी की पुकार पर हमारे 'छलिया' आ जरूर जाना वरना खाकी उतरते देर न लगेगी। 'तेरा मेरा साथ अमर फिर क्यों मुझको लगता है डर'

आ भी जा , आ भी जा , बेवफा आ भी जा
पकडा न जा तो कम से कम हिस्सा तो दे जा

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