<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219</id><updated>2012-01-06T00:24:51.068-08:00</updated><category term='Train'/><category term='आई बी एन ख़बर से साभार'/><category term='नरेगा'/><category term='टेनरियों के अवशेष'/><category term='खास बात'/><category term='Kanpur'/><category term='डेली Passenger'/><category term='कानपुर'/><category term='speakasia'/><category term='Speak Asia'/><category term='( Mayank Garg ) सी0ए0'/><category term='Khulasa'/><category term='मयंक गर्ग'/><category term='स्‍पीक एशिया'/><category term='केस्‍को'/><category term='saol'/><category term='प्रदूषण'/><category term='- गुरूदेव श्री Shalendra चिंतक द्वारा'/><category term='speakasiaonline'/><title type='text'>खुलासा टाइम्‍स विजन</title><subtitle type='html'>राष्‍ट्रीय विचारों का निष्‍पक्ष एवं निर्भीक न्‍यूज र्पोटल</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://khulasatimes.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>33</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-845445030308667608</id><published>2011-10-21T04:56:00.000-07:00</published><updated>2011-10-21T05:01:53.768-07:00</updated><title type='text'>आंकड़ों से गरीबी हटाएं, गरीब नहीं</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-gEM9J1ysnDc/TqFfKSJ2mWI/AAAAAAAAAu0/zkl5cq9T-Qk/s1600/indian-poverty.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 320px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-gEM9J1ysnDc/TqFfKSJ2mWI/AAAAAAAAAu0/zkl5cq9T-Qk/s400/indian-poverty.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5665914436485290338" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अर्थशास्त्री आंकड़ों की मदद से गरीबी हटाने का दावा करते हैं। हमारे कानपुर में एक मंजू कुरील का परिवार है जो उन करोड़ों लोगों के आंकड़ों का हिस्सा है। इस परिवार के पास जमीन है, एक कच्चा मकान भी है। बैलों की जोड़ी है, दो-चार बकरियां भी हैं। बिजली का कनेक्शन, रेडियो के साथ मोबाइल भी है जिसे दस रुपये से रिचार्ज भी करवाती है। दो बेटे सरकारी स्कूल में पढ़ने भी जाते हैं। पूरा का पूरा परिवार दो बीघा जमीन में लगा रहता है। यह परिवार मनरेगा में सौ दिन भी पूरा करता है। एक बच्चा स्कूल की छुट्टियों में पलायन कर मजदूरी करने जाता है। वहां से भी कुछ न कुछ जरूर लाता है। बावजूद इसके भी इस परिवार में दोनों जून सब्जी नहीं बनती है। रोज-रोज की चिंता लगी रहती है कि कहीं से कोई अतिरिक्त मजदूरी नहीं मिली तो कल क्या होगा? &lt;br /&gt;ऐसी स्थिति में इस परिवार को मनमाफिक खाना तो केवल तीज-त्योहार पर ही मिल पाता है। बीमारी भी दरवाजे पर इंतजार करती है। कर्ज पहले भी था, आज भी है और इन हालातों को देखते हुए तो इस परिवार में जो भी जन्म लेगा वो कर्ज में ही लेगा और कर्ज में ही मरेगा। यह परिवार चयनित भी है और दो रुपये किलो गेहूं भी प्राप्त करता है। कल यदि किसी कारण से यह परिवार चयनित सूची से हट जाए और इस परिवार को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार एवं सस्ता अनाज नहीं मिले तो यह परिवार गरीबी से भूखमरी की स्थिति में आ जाएगा। आज यदि हम चाहते हैं कि मंजू कुरील जैसे परिवार की अगली पीढ़ी गरीबी से ऊपर उठे तो इसके लिए हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा कि उस परिवार को खाना, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार की न्यूनतम आवश्यकता की पूर्ति हो। वरना जब भी अकाल पड़े या परिवार पर संकट आए तो यह परिवार गरीबी में पूरी तरह डूब जाएगा। मंजू कुरील का परिवार तो भाग्यशाली है जो इनका नाम चयनित सूची में आ गया। कई ऐसे परिवार है जो चयनित नहीं है और आज भी गरीबी और भूखमरी में जी रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;योजना आयोग ने एक हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यदि देश के किसी भी व्यक्ति को 32 रुपये प्रतिदिन मिले तो वह जीने के लिए पर्याप्त है। इस पर बवाल मचने के बाद योजना आयोग के अध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया एवं ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने इसे गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों एवं सुविधाओं से अलग करते हुए घोषणा की कि हाल में चल रहे सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण के समापन एवं विश्लेषण के बाद ही तय किया जाएगा कि किसे, कौन सी मूलभूत सुविधा का अधिकार मिलेगा। इन आंकड़ों में समस्या तब उठती है जब इस रेखा को इन मूल सुविधाओं के साथ जोड़ा जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यह केवल आंकड़ों की बात नहीं है, हर आंकडे़ के पीछे एक मंजू कुरील और उसका परिवार है जो अपनी जिंदगी जीने का प्रयास कर रहा है। गरीबी रेखा के आंकड़ों के अलावा कुछ और आंकड़े भी देश में तैयार हो रहे हैं। इन्हें भी समझने की जरूरत है। आज भारत के 48 फीसदी बच्चे कुपोषित हैं और इसमें हम दुनिया के 158वें स्थान पर खड़े है। हमारे यहां शिशु मृत्यु दर एक हजार पर 52 है, इस मामले में हम 122वें स्थान पर हैं। स्वास्थ्य पर हम सकल घरेलू उत्पाद का 1.1 फीसदी ही खर्च करते हैं, इसमें हम 162वें स्थान पर है। इन सब में हम बांग्लादेश से भी काफी पीछे हैं। 32 रुपये और बच्चों के कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर, स्वास्थ्य खर्चे के बीच में इसलिए सीधा रिश्ता है कि हम इन आंकड़ों से आम जनता को मूलभूत सुविधा से वंचित रखना चाहते हैं और गरीबी पर खर्चो को कम से कम करना चाहते हैं।&lt;br /&gt;यदि हम आज कुछ मूलभूत सुविधाओं को सार्वभौमिक बना दें तो हम वास्तव में गरीबी से उभरने के रास्ते पर चल पड़ेंगे। भारत जैसे देश में यदि हम हर इंसान को स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और न्यूनतम रोजगार के अवसर प्रदान कर पाएं तो यह हमारी बड़ी उपलब्धि होगी। आज देश में खाद्य सुरक्षा कानून पर बहस चल रही है। इसमें मुख्य मुद्दा है कि हम कितने लोगों को सस्ता अनाज देंगे। यदि 32 रुपये का आंकड़ा काम में लेते है तो हम अपने देश के लाखों परिवारों को सस्ते अनाज से वंचित रखेंगे। इससे यह भी स्पष्ट होगा की हमने 32 रुपये वाली बहस को कुछ ही दिनों के लिए टाला है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस पूरी बहस का यदि हम सार्थक परिणाम निकालना चाहते हैं तो हमें कुछ साहसिक और मानवीय कदम उठाने पड़ेंगे। गोदामों में सड़ते हुए अनाज को बांटने का साहस करना पड़ेगा और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सस्ते अनाज का हक सभी को देना पड़ेगा। स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे क्षेत्र पर अपना खर्च बढ़ाकर सबको शिक्षा और सबको स्वास्थ्य की सुविधा की गारंटी देनी पड़ेगी। रोजगार गारंटी में न्यूनतम मजदूरी देने का कर्तव्य निभाना पड़ेगा। तभी हमारे सर्वेक्षणों में गरीबी गिरती हुई नजर आएगी। जब तक हमारे परिवारों की कहानियों को आंकड़ों से उभारकर नहीं देखेंगे तब तक आंकड़ों की मार गरीबों पर पड़ती रहेगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-845445030308667608?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/845445030308667608'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/845445030308667608'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/10/blog-post.html' title='आंकड़ों से गरीबी हटाएं, गरीब नहीं'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-gEM9J1ysnDc/TqFfKSJ2mWI/AAAAAAAAAu0/zkl5cq9T-Qk/s72-c/indian-poverty.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-4302502831499704639</id><published>2011-08-04T02:01:00.001-07:00</published><updated>2011-08-04T02:01:36.449-07:00</updated><title type='text'>येदियुरप्पा से कांग्रेसी सांसदों और राबर्ट का भी रिश्ता है</title><content type='html'>कर्नाटक के लोकायुक्त संतोष हेगड़े की वह रिपोर्ट आ गयी है जिसमें  उन्होंने मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके परिजनों पर भ्रष्टाचार का आरोप  लगाया है. अपनी रिपोर्ट में लोकायुक्त ने कहा है कि राज्य में खनन क्षेत्र  में 16 हजार 85 करोड़ का घोटाला हुआ है जिसमें से 30 करोड़ रूपया  मुख्यमंत्री येदियुरप्पा और उनके परिजनों को दिया गया है.लेकिन इस रिपोर्ट में एक चौंकानेवाला खुलासा यह है कि जिस साउथ वेस्ट  माइनिंग कंपनी ने येदियुरप्पा के परिवार को ये तीस करोड़ रूपये दिये हैं वह  माइनिंग कंपनी कांग्रेसी सांसद नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल की है. पूरा  देश जानता है कि जिंदल परिवार खुलेआम कांग्रेसी है. सज्जन जिंदल के पिता  ओपी जिंदल हरियाणा में कांग्रेस के मंत्री थे, तो उनकी मां सावित्री जिंदल  आज भी हरियाणा सरकार में मंत्री हैं.सबसे बड़ा सवाल उठाया गया है नवीन जिंदल के भाई सज्जन जिंदल के  जेएसडब्लू की सब्सियडरी कंपनी साउथ वेस्ट माइनिंग पर. लोकायुक्त संतोष  हेगड़े का कहना है कि सज्जन जिंदल की इस कंपनी ने दस करोड़ रूपये  येदियुरप्पा के परिवार के प्रेरणा ट्रस्ट को दिये तथा बीस करोड़ रूपये में  येदियुरप्पा के परिवार से एक ऐसी जमीन खरीदी जिसकी बाजार में कीमत महज 1.4  करोड़ थी. सज्जन जिंदल देश के बड़े स्टील व्यापारी है और उनकी कंपनी जिंदल स्टील  वर्क्स का सालाना कारोबार 23 हजार करोड़ है. यह जिंदल स्टील वर्क्स ओपी  जिंदल समूह का हिस्सा है जिसकी एक अन्य कंपनी जेएसडब्लू इनर्जी में यही  सज्जन जिंदल अध्यक्ष हैं और कांग्रेस के सांसद नवीन जिंदल उपाध्यक्ष. नविन  जिंदल राहुल गाँधी के काफी करीबी है . अगर कांग्रेस आज मीडिया में कर्णाटक  और यदुराप्प्पा चिल्ला रही है तो इस देश को पूरी सच्चाई क्यों नहीं बताती ?  एक तरफ यदुर्रप्पा को सबसे बड़ा भ्रष्ट बता रही है लेकिन नविन जिंदल और  सावित्री जिंदल का नाम पर लोकायुक्त ने सबसे बड़ा आरोप लगाया है . जाहिर है जब कर्नाटक में खदानों को खोदकर खजाना भरने की होड़ लगी हो तो  सज्जन जिंदल भला क्यों पीछे रहते. सज्जन जिंदल ने तत्काल एक अस्थाई कंपनी  बनाई और उसके नाम पर कर्नाटक में लोहा खोदने पहुंच गये. लोकायुक्त संतोष  हेगड़े ने अपनी रिपोर्ट में सवाल उठाया है कि " जो कंपनी आर्थिक तौर पर  स्थिर नहीं है, उसके द्वारा असामान्य भुगतान किए जाने के बारे में मुङो यह  समझने में बहुत कठिनाई हो रही है कि क्या कोई उधार लेकर दान करेगा।' लेकिन कांग्रेस सोनिया गाँधी के नाम पर सब चुप क्यों है ? जब सोनिया गाँधी  ने राजनीति में कदम रखा तब उस समय यूपी में कांग्रेस की हालात बहुत खराब थी  . रायबरेली में सोनिया को हार का डर सता रहा था , फिर कांग्रेस ने उनके  लिए सबसे आसान सीट की तलाश की . गौरतलब है की पुरे देश में सिर्फ बेल्लारी  ही एक ऐसी सीट है जहा आज़ादी के बाद आज तक कभी कांग्रेस हारी नहीं है . इसलिए कांग्रेस ने बेल्लारी के किंग और उस समय कांग्रेस के सदयस रेड्डी  भाईओं से सोनिया गाँधी को हर हाल में जिताने की आपील की . असल में सोनिया  गाँधी उत्तर भारत और दक्षिण भारत दोनों जगह से हर हाल में जीतकर देश की  जनता को ये सन्देश देना चाहती थी की उनका प्रभाव पुरे देश में है .. आप  लोगो को याद होगा की जब इंदिरा गाँधी ने राजनीती में कदम रक्खा था तो  उन्होंने भी यही किया था .जाहिर है रेड्डी भाई जो उस समय एक सड़क छाप दादा  और माफिया हुआ करते थे और उनके पिता एक मामूली कांस्टेबल थे सोनिया को  जिताने के नाम पर उसकी खूब कीमत ली . सोनिया गाँधी बेल्लारी से जिताने के  बाद रेड्डी भाईओ का पुरे दक्षिण भारत में तूती बोलने लगी और रेड्डी बंधुओ  के लिए आन्ध्र और कर्णाटक में कही भी खनन करने का मौका मिल गया .. उस समय  इंडिया टुडे ने एक रिपोट भी दी थी   &lt;b&gt;"रेड्डी रिपब्लिक" ..&lt;/b&gt; और आज कांग्रेस मीडिया में भ्रम फैला रही है . जो भी लोकायुक्त ने घोटाला  उजागर किया है वो पिछले आठ सालो का है . यदुर्रप्पा तो सिर्फ तीन साल से  मुख्यमंत्री है . &lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-4302502831499704639?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4302502831499704639'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4302502831499704639'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/08/blog-post_04.html' title='येदियुरप्पा से कांग्रेसी सांसदों और राबर्ट का भी रिश्ता है'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3397835217072490128</id><published>2011-08-03T11:29:00.000-07:00</published><updated>2011-08-03T11:40:35.256-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्‍पीक एशिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Speak Asia'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='speakasiaonline'/><title type='text'>आखिर सब स्‍पीक एशिया के पीछे ही क्‍यों पडे हैं ?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-uFPqVw4qeGc/TjmWDAWgciI/AAAAAAAAAuE/upoutXGP21E/s1600/speak.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 138px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-uFPqVw4qeGc/TjmWDAWgciI/AAAAAAAAAuE/upoutXGP21E/s400/speak.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5636701387009061410" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;भारतीय जनता पार्टी जितने वर्षो देश व विभिन्न प्रदेशों में सत्ता में रही है। संभवत: अब तक के अपने तमाम कार्यकाल में इस देश भर के तमाम नेताओं ने इतने लोगों को रोजगार नहीं दिया होगा जितनों का रोजगार इस पार्टी के एक कपूत नेता किरीट सोमइया ने सिर्फ अपनी राजनीति चमकाने के लिए छीन लिया। किरीट ने इन्वेस्टर फोरम के मंच का इस्तेमाल कर 20 लाख लोगों से जुड़े उनके परिजनों जो कुल संख्या 1 करोड़ से भी अधिक पहुंचती है को सड़क पर ला दिया। वाह नेता जी। सुना था नेता जनता के लिए लड़ते हैं, आपने तो अपने ही देश वासियों के पेट पर लात मार कर अपनी नेतागिरी का नायाब उदाहरण पेश किया है। 1 करोड़ से अधिक  स्पीक एशियन आपकी पार्टी के इस उपकार को ताउम्र नहीं भुला पाएंगे। नेता जी, स्पीक एशिया हर आम हिंदुस्तानी के सपनों में रंग भर रही थी। यह कंपनी 12 मई तक के अपने तमाम भुगतान क्लीयर कर चुकी थी। लोगों का पैसा रोकना कंपनी का मकसद नहीं था इसी लिए कंपनी अंत तक मीडिया से लड़ती रही। आरबीआई ने कंपनी के लेनदेन पर प्रतिबंध लगाया तब जाकर कंपनी का लेनदेन रूका अन्यथा इस कंपनी की भांति लेन-देन में पारदर्शिता भारत में क्या विश्व में कहीं आज तक देखने सुनने में नहीं आई। किरीट जी आप फक्र महसूस करते हैं अपने किए पर किंतु 1 करोड़ लोगों की बददुआएं संभवतयः अब आपके बचे दिनों में आपको चैन से न रहने दें। किरीट जी आप नेता हैं और हम आम जनता हैं। सिर्फ अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग कर सकते हैं, किंतु आपको कुछ बिंदुओं पर विचार करना चाहिए। पहला कि देश में असंवेदनशीलता की तमाम हदें पार करते मीडिया का भौंपू बनते हुए आपको लज्जा नहीं आई़? क्या आपने सोचा कि हमारी एजेंसियां स्पीक एशिया का क्या बिगाड़ पाएंगी? क्या चैनल समेत आप सभी के प्रयासों से इस प्रकरण में कुछ हाथ लगेगा? संभवतयः नहीं। देश की तमाम एजेंसियां भी स्पीक एशिया का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगी क्योंकि उसने सभी कुछ नियमों के दायरे में किया। हिंदुस्तान में सिर्फ पंजीकरण की एक औपचारिकता की दोषी स्पीक एशिया को अंततः ठहराया जा सकेगा क्योंकि इससे अधिक दोष स्पीक एशिया पर साबित करने का कोई आधार कोई भी एजेंसी साबित नहीं कर पाएगी। बेहतर होता कि हमारे नेता व एजेंसियां संवेदनशीलता का परिचय देते हुए कंपनी के आग्रह के मुताबिक उसका बिजनेस माड्यूल देखती यदि कोई गैर कानूनी कार्य हुआ था तो पहले कंपनी से जुड़े 20 लाख लोगों का पैसा सुरक्षित करवाती और फिर देश के कानूनों से बांध कर कंपनी को सशर्त काम करने की अनुमति देती। ताकि कंपनी के पास विदेशों में पड़ा देश का पैसा भी लौट आता और देश के 1 करोड़ लोगों का रोजगार भी न छिनता। सरकारी अमले को यह तो समझना चाहिए था कि यदि स्पीक एशिया भागना ही चाहती तो वह इस कदर खुल कर सामने क्यूं आती, क्यों हर मंच पर हर जांच में पूरा सहयोग देने की बात करती। मीडिया वालों व नेताओं को यह बात भली भांति समझ लेनी चाहिए कि स्पीक एशिया से जुड़े पैनलिस्ट बालिग थे। वह अपना भला बुरा भली भांति समझते हैं कौन उन्हें गुमराह कर रहा है और कौन सच बोल रहा है सब सभी कुछ भली भांति समझते हैं। मीडिया का दुरूपयोग कैसे होता है यह भी भली भांति जानते हैं। मीडिया कैसे राजनेताओं व जांच एजेंसियों को इस्तेमाल करता है यह बात भी अब पर्दे की नहीं रही। कोई बात नहीं चुनाव आने को हैं जनता भी जवाब देना जानती है। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;VOICE OF PRESS&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3397835217072490128?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3397835217072490128'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3397835217072490128'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/08/blog-post.html' title='आखिर सब स्‍पीक एशिया के पीछे ही क्‍यों पडे हैं ?'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-uFPqVw4qeGc/TjmWDAWgciI/AAAAAAAAAuE/upoutXGP21E/s72-c/speak.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-82273886661856176</id><published>2011-07-23T03:21:00.000-07:00</published><updated>2011-07-23T03:30:43.979-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='saol'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्‍पीक एशिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Speak Asia'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='speakasiaonline'/><title type='text'>स्पीक एशिया के बारे में ख़बरों का बाज़ार गरम</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-ZQZLTh-jyFo/TiqhQXtCBxI/AAAAAAAAAt8/xNIv8FZwZvs/s1600/206119_232405353459494_221479394552090_732172_6124499_n.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 230px; height: 364px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-ZQZLTh-jyFo/TiqhQXtCBxI/AAAAAAAAAt8/xNIv8FZwZvs/s400/206119_232405353459494_221479394552090_732172_6124499_n.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5632491586593097490" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;भारत सरकार ने स्पीक एशिया प्रबंधन को भारत में कारोबार के लिए एक विकल्प सुझाया है, कि पुरानी सभी देनदारियां चुकाओ और नए सिरे से भारत में रजिस्ट्रेशन कराकर काम शुरू करो। सूत्र बताते हैं कि स्पीक एशिया के भारत में कारोबार के लिए सरकार पूरी तरह तैयार है, लेकिन वह चाहती है कि कंपनी पूरी तैयारियों के साथ आए और कुछ इस तरह से कारोबार चले कि भारत के वर्तमान 20 लाख और इसके बाद जुडऩे वाले पेनलिस्टों के हित सुरक्षित रहें, उनके साथ कभी धोखा न हो पाए। इसलिए सरकार चाहती है कि स्पीक एशिया कंपनी या तो भारत में संपत्ति जुटाए या नगद रकम सरकार के पास सुरक्षित रखे, ताकि वक्त जरूरत काम आवे। &lt;br /&gt;स्पीक एशिया प्रबंधन ने इस मामले में अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। प्रबंधन उन तमाम तरीकों को खोजने की कोशिश कर रहा है जिनको अपनाकर बिना नगद भुगतान किए, सभी देनदारियां चुकता की जा सकें। &lt;br /&gt; वहीं स्पीक एशिया v/s स्टार न्यूज की लड़ाई में स्पीक एशिया के लिए अच्छी खबर है। स्टार न्यूज ने स्पीक एशिया से संबंधित एक खबर को गलत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए खेद प्रकट किया है। विदित हो कि स्टार न्यूज ने बताया था कि बाम्बे हाईकोर्ट ने दो दिन के भीतर स्पीक एशिया के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए हैं। स्टार न्यूज पर यह खबर प्रसारित होने के बाद देश भर की मीडिया ने इस खबर को लिफ्ट किया, लेकिन फिर स्टार न्यूज ने खेद जताते हुए बताया कि बॉम्बे हाईकोट ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश नहीं दिए थे, बल्कि अच्छे अधिकारियों से जांच कराने और आवश्यकता हो तो एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे।&lt;br /&gt;हम लोग रोज़ देख रहे हैं कि‍ कितनी MLM कंपनीयां रोज़ बंद हो रही हैं । तो सभी सिर्फ स्पीक एशिया के ही पीछे क्यों पडे हैं? स्‍पीक एशिया की ही तरह द एड मैट्रिक्‍स भी विदेशी कम्‍पनी थी पर उसका भारत में आसानी से रजिस्‍ट्रेशन हो गया और पैसा ट्रान्‍सफर भी शुरू हो गया है।  और जो कंपनीयां भारत में रजिस्टर भी  थीं और बंद हो गई उनका किसी ने क्‍या बिगाड लिया। और जो आज भी चल रही हैं वे भाग गयीं तो कोई उनका  क्या बिगाड लेगा। सवाल यह है कि जब बाकी सब को छूट है कि आओ भाई जैसे चाहे लूट लो तो स्‍पीक एशिया के क्‍या कांटे लगे हैं। आज तो यह कंपनी पिछले तीन महीने से सिस्टम से लड़ रही है और टिकी हुई है, अगर इस सारी प्रक्रिया के दौरान हताश होकर यह कंपनी भी दूसरी कम्पनियों की तरह अपना बोरिया बिस्तर गोल कर जाती है तब 20 लाख लोगों का क्या होगा | और अगर 5 - 10 साल कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद स्पीक एशिया भारत में रजिस्टर हो भी जाती है तो क्या फ़ायदा?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-82273886661856176?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/82273886661856176'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/82273886661856176'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_23.html' title='स्पीक एशिया के बारे में ख़बरों का बाज़ार गरम'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-ZQZLTh-jyFo/TiqhQXtCBxI/AAAAAAAAAt8/xNIv8FZwZvs/s72-c/206119_232405353459494_221479394552090_732172_6124499_n.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3595168767799368237</id><published>2011-07-20T07:04:00.000-07:00</published><updated>2011-07-20T07:05:33.896-07:00</updated><title type='text'>पाक के नापाक इरादे का खुलासा</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/-8F39XlTpn5U/TibgqIwF-tI/AAAAAAAAAtY/l6zt1VGycdE/s1600/terrorism_india.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 360px; height: 305px;" src="http://2.bp.blogspot.com/-8F39XlTpn5U/TibgqIwF-tI/AAAAAAAAAtY/l6zt1VGycdE/s400/terrorism_india.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5631435398581713618" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के नापाक इरादों का एक बार फिर खुलासा हुआ है। अमेरिका में एफबीआई अधिकारियों ने कश्मीर मामले पर लॉबिंग करने वाले दो आईएसआई एजेंटों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि इन्होंने कश्मीर मामले पर लॉबिंग करने के लिए गैरकानूनी तरीके से पैसा लगाने का आरोप है। इन एजेंटों को 2 दशकों में आईएसआई ने 40 लाख डॉलर मुहैया कराए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमेरिकी एजेंसी (एफबीआई) ने पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी नागरिक 62 साल के गुलाम नबी फई को सोमवार को गिरफ्तार कर कश्मीर मामले पर भारत के खिलाफ अमेरिकी नीति को प्रभावित करने की 2 दशकों से जारी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फई अमेरिका में वर्जिनिया का निवासी है, जबकि दूसरा आरोपी पाकिस्तानी मूल का जहीर अहमद भी अमेरिकी नागरिक है। जहीर के खिलाफ एफबीआई ने मंगलवार को मामला दर्ज किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फई कश्मीरी-अमेरिकन काउंसिल (केएसी) नामक गैर-सरकारी संगठन का कार्यकारी निदेशक है, जो पाकिस्तानी सरकार द्वारा चलाया जा रहा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एफबीआई ने आरोप लगाया है कि दोनों लम्बे समय से इस साजिश में शामिल थे और कानूनी तौर पर पाकिस्तान की सरकार के साथ अपनी सम्बद्धता को दर्शाए बिना अमेरिका में पाकिस्तानी एजेंट के तौर पर काम करते थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पाकिस्तानी के इन दोनों आरोपियों के खिलाफ एफबीआई द्वारा दाखिल किए गए 43 पन्नों के हलफनामे में कहा गया है कि पाकिस्तान की सेना और उसकी सहयोगी इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने भारत के खिलाफ अमेरिकी कश्मीरी नीति को प्रभावित करने के लिए 2 दशकों के दौरान 40 लाख डॉलर से अधिक धनराशि इन्हें मुहैया कराई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अधिकारियों के मुताबिक यदि दोनों लोगों पर आरोप साबित हो जाएगा तो उन्हें 5 साल की सजा हो सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3595168767799368237?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3595168767799368237'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3595168767799368237'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_20.html' title='पाक के नापाक इरादे का खुलासा'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/-8F39XlTpn5U/TibgqIwF-tI/AAAAAAAAAtY/l6zt1VGycdE/s72-c/terrorism_india.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-8728407872055729095</id><published>2011-07-19T01:13:00.000-07:00</published><updated>2011-07-19T01:16:30.375-07:00</updated><title type='text'>सत्य साई का खजाना भी कम नहीं, 34 किलो सोना, 340 किलो चांदी...</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-QuVfZsJ4ZMg/TiU9Uje-qoI/AAAAAAAAAsw/F80OL8c_29c/s1600/Sathya-Sai-Baba.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 285px; height: 380px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-QuVfZsJ4ZMg/TiU9Uje-qoI/AAAAAAAAAsw/F80OL8c_29c/s400/Sathya-Sai-Baba.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630974332428528258" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight:bold;"&gt;पुट्टपर्थी&lt;/span&gt; । सत्य साई बाबा की मौत के बाद से उनके खजाने के गुप्त भेद भी खुलते जा रहे हैं। ताजा मामला उनके निजी आवास का है जहां से 34 किलो सोना, 340 किलो चांदी और करीब 2 करोड़ रुपए नगद मिले हैं। तलाशी का अभियान जारी है और कई इमारतों के बंद कमरे खोले जाने अभी बाकी हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आंध्र प्रदेश सरकार के आदेश पर यजुर मंदिर और पूर्णचंद्र कॉम्प्लेक्स के आठ कमरों को खोले जाने से यह खजाना मिला है। जांच टीम की अगुवाई अनंतपुर के जिलाधिकारी वी गुरुदास ने की।&lt;br /&gt;चार कमरे यजुर मंदिर के हैं और चार पूर्णाचंद्र कॉम्प्लैक्स के। गौरतलब है कि यजुर मंदिर में शिफ्ट होने से पहले सत्य साईं पूर्णाचंद्र कॉम्प्लैक्स में ही रहा करते थे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सूत्रों के मुताबिक इन आठ कमरों की तलाशी में 34 किलो सोना, 340 किलो चांदी और 1 करोड़ 98 लाख 53 हजार कैश तो मिला ही, इसके साथ ही चांदी के छत्र और कुछ रस्सियां भी मिली हैं जिनका इस्तेमाल बाबा के झूले के लिए किया जाता था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इतना ही नहीं, ढेर सारी ऐसी बेशकीमती चीजें भी मिली हैं जिन्हें खासतौर पर सत्य साई के जन्मदिन और गुरु पूर्णिमा के मौके पर इस्तेमाल किया जाता था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राज्य सरकार के आदेश पर यजुर मंदिर में 20 जुलाई तक तलाशी अभियान चलेगा। इस दौरान जिलाधिकारी के साथ सत्य साईं सेंट्रल ट्रस्ट के चार सदस्य भी मौजूद रहेंगे। तीन दिन की तलाशी के बाद ये टीम राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;गौरतलब है कि पहले दौर की तलाशी में सत्य साईं के कमरे से कुल 38 करोड़ रुपये का खजाना मिला था। सत्य साईं ट्रस्ट के मुताबिक सत्य साईं के खास कमरे से 11 करोड़ 56 लाख 47 हजार रुपए कैश, 98 किलो सोना, 307 किलो चांदी, करोड़ों के हीरे जवाहरात मिले थे। इसके अलावा 2 जुलाई को भी जांच अधिकारियों को सोने, चांदी और हीरे की अंगूठियां मिली थीं जिनकी कुल कीमत 76 लाख 89 हजार आंकी गई थी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;फिलहाल सबकी नजरें यजुर मंदिर की दूसरी इमारतों के बंद पड़े बाकी कमरों पर टिकी हैं जहां पर अभी तलाशी ली जाएगी। अभी तक मिले खजाने को आयकर विभाग के निर्देश पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में जमा करा दिया गया है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-8728407872055729095?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8728407872055729095'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8728407872055729095'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/34-340.html' title='सत्य साई का खजाना भी कम नहीं, 34 किलो सोना, 340 किलो चांदी...'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-QuVfZsJ4ZMg/TiU9Uje-qoI/AAAAAAAAAsw/F80OL8c_29c/s72-c/Sathya-Sai-Baba.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-2337558144219996567</id><published>2011-07-18T08:47:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T08:50:49.384-07:00</updated><title type='text'>इंटरनेट पर रोजाना अपलोड हो रहे हैं 300 करोड़ नये वीडियो</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-jXUHaDd1VtI/TiRWUXFdSEI/AAAAAAAAAso/HD3YUvvX-YA/s1600/a.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 300px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-jXUHaDd1VtI/TiRWUXFdSEI/AAAAAAAAAso/HD3YUvvX-YA/s400/a.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630720341914241090" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;दुनिया के जाने माने सोशल मीडिया विशेषज्ञ तथा कोलंबिया स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के भारतीय मूल के प्रोफेसर श्रीनिवासन ने आज बताया कि इंटरनेट पर डाटा की भीड़ इतनी बढ़ गयी है कि हर दिन इस पर तीन सौ करोड़ नये वीडियो अपलोड किये जा रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;श्रीनिवासन ने यहां अमेरिकी सेंटर तथा टाटा स्टील के सौजन्य से आयोजित एक सेमिनार में बताया कि दुनिया भर में हर रोज तीन अरब अथवा तीन सौ करोड़ वीडियो इंटरनेट पर अपलोड किये जा रहे हैं। डाटा की भीड़ ऐसी है कि हर मिनट में जितना वीडियो अपलोड होता है अगर उसे देखना हो तो 48 घंटे का समय लग जाएगा। ऐसे में अगर हम चाहते हैं कि हमारा कंटेट सही तरीके से लक्षित लोगों तक पहुंचे तो इसके लिए विशेष रणनीति बनानी होगी।&lt;br /&gt;उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अभी कुल दो अरब जबकि भारत में करीब 10 करोड़ लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं। यह संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में कॉर्पोरेट जगत को फेसबुक, टि्वटर, लिंकडिन और गूगल प्लस जैसे प्रभावी सोशल मीडिया टूल्स को अपने व्यवसायगत इस्तेमाल के लिए अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की रणनीति तैयार करनी चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि टिव्टर जैसे सामाजिक मेलजोल साइट के अंधाधुंध इस्तेमाल से मुश्किले भी बढ़ी हैं। अमेरिका के कई खेल पत्रकार कहने लगे हैं कि अब हर खिलाड़ी ट्विट करने लगा है इसलिए सब पर नजर रखना काफी टेढ़ी खीर है। भारत में भी कुछ ऐसा ही नजारा दिख रहा है। सुपरस्टार अमिताभ बच्चन से लेकर कई लोग हर छोटी बड़ी बात के लिए टि्वटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सेमिनार में कोलकाता स्थित अमेरिकी सेंटर की निदेशक सह सार्वजनिक मामलों की दूत कास्टेन्स कोल्डिंग जोन्स भी मौजूद थीं।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-2337558144219996567?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2337558144219996567'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2337558144219996567'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/300.html' title='इंटरनेट पर रोजाना अपलोड हो रहे हैं 300 करोड़ नये वीडियो'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-jXUHaDd1VtI/TiRWUXFdSEI/AAAAAAAAAso/HD3YUvvX-YA/s72-c/a.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-7968558649269486919</id><published>2011-07-18T03:40:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T03:43:36.956-07:00</updated><title type='text'>दिग्विजय सिंह को काला झंड़ा दिखाने की कोशिश</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-fwIoss3Y2w8/TiQOU-SyoCI/AAAAAAAAAsg/cbuNxa05fcQ/s1600/Digvijay_Singh_300.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 360px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-fwIoss3Y2w8/TiQOU-SyoCI/AAAAAAAAAsg/cbuNxa05fcQ/s400/Digvijay_Singh_300.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630641187601948706" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;उज्जैन।। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के आरएसएस विरोधी बयानों से नाराज भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने जब उन्हें काला झंडा दिखाने की कोशिश की तो उन्हें गुस्सा आ गया। दिग्विजय सिंह ने काल झंडा दिखाए जाने की कोशिशों पर कड़ा एतराज किया और फिर वहां मौजूद कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने बीजेवाईएम कार्यकर्ताओं की पिटाई की। आरोप तो यहां तक है कि खुद दिग्विजय सिंह ने भी इन लोगों को थप्पड़ जड़े।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि इस बारे में दर्ज एफआईआर में दिग्विजय सिंह का नाम नहीं है, लेकिन एक राष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार में छपी खबर के मुताबिक दिग्विजय सिंह भी विरोध कर रहे युवकों को पीटने में पीछे नहीं थे। बाद में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि मैंने ऐसी कोई गलत बात नहीं कही है जिस पर मुझे काले झंड़े दिखाए जाएं। जब उनसे पूछा गया कि आप इतने नाराज क्यों हो गए, तो उन्होंने कहा, ' मैं कमजोर नहीं हूं। '&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसके बाद सिंह होटेल मुस्कान पहुंचे जहां भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के कार्यकर्ताओं ने तोड़फोड़ की। यहां भी कांग्रेस और भाजयुमो कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और मारपीट हुई। हालांकि, पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हालांकि बीजेपी भी दिग्विजय सिंह का नाम लेकर कुछ नहीं कह रही। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं-समर्थकों ने लाठी, बेस बॉल के बैट और चाकुओं से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर हमला किया। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष प्रभात झा ने भी काला झंडा दिखाने की कोशिशों का बचाव करते हुए उसे विरोध का लोकतांत्रिक तरीका कहा, लेकिन मारपीट की घटना का दोष ' कांग्रेस के असामाजिक तत्वों ' के सिर मढ़ दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्वों से सरकार निपटेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इससे पहले एक दिग्विजय सिंह ने यह बात दोहराई कि देश में आरएसएस आतंक फैलाने के काम में सक्रिय है और उसके पास बम बनाने के कारखाने हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में हुए ताजा आतंकवादी हमले की जांच के दायरे में हिन्दू संगठनों को भी लाया जाना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मुंबई ब्लास्ट को लेकर उनके शनिवार के बयान के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैंने सिर्फ यह कहा है कि इस घटना में हिन्दू आतंकवादी संगठनों सहित सभी आतंकवादी संगठनों की भूमिका की जांच होनी चाहिए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-7968558649269486919?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7968558649269486919'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7968558649269486919'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_454.html' title='दिग्विजय सिंह को काला झंड़ा दिखाने की कोशिश'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-fwIoss3Y2w8/TiQOU-SyoCI/AAAAAAAAAsg/cbuNxa05fcQ/s72-c/Digvijay_Singh_300.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-6205352507732339139</id><published>2011-07-18T02:48:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T02:50:49.053-07:00</updated><title type='text'>मेरठ के कसाई को बम विस्फोट के लिए 2 करोड़ का 'ऑफर' मिला</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-2820p-vaEMs/TiQB8p4H-5I/AAAAAAAAArs/zUwKl1puaes/s1600/india-palace-415x275.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 265px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-2820p-vaEMs/TiQB8p4H-5I/AAAAAAAAArs/zUwKl1puaes/s400/india-palace-415x275.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630627575664999314" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;लखनऊ ।। मेरठ के एक मांस कारोबारी (कसाई) को शहर में दंगे फैलाने और बम रखने के लिए 2 करोड़ रुपए ऑफर किए जाने के एक सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है। उस शख्स को यह ऑफर ईरान से फोन पर किया गया। पुलिस ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मिली जानकारी के मुताबिक मेरठ के इस्माइल नगर में रहने वाले हाशिम इलाही ने पुलिस को बताया कि 13 जुलाई की रात उसके पास ईरान से तीन फोन आए। इलाही के मुताबिक फोन करने वाले ने उसे शहरमें दंगे फैलाने और बम विस्फोट करने की एवज में 2 करोड़ रुपए का ऑफर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्पेशल डीजी बृज लाल ने मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए कहा कि मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई है। उन्होंने बताया कि शुरुआती छानबीन से पता चला है कि फोन कॉल ईरान से शुरू हुआ और सब्सक्राइबर तक एक प्राइवेट ऑपरेटर के जरिए पहुंचा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-6205352507732339139?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/6205352507732339139'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/6205352507732339139'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/2.html' title='मेरठ के कसाई को बम विस्फोट के लिए 2 करोड़ का &apos;ऑफर&apos; मिला'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-2820p-vaEMs/TiQB8p4H-5I/AAAAAAAAArs/zUwKl1puaes/s72-c/india-palace-415x275.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-7776620772041353618</id><published>2011-07-18T02:17:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T02:21:25.644-07:00</updated><title type='text'>काले धन की कालिख</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-4-pCtkNrFHw/TiP7EGGRTlI/AAAAAAAAAq0/DB4rhkBnJJ0/s1600/RBI_0.gif.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 300px; height: 250px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-4-pCtkNrFHw/TiP7EGGRTlI/AAAAAAAAAq0/DB4rhkBnJJ0/s400/RBI_0.gif.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630620006918213202" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;अपनी जिस आय पर कोई व्यक्ति समुचित आयकर का भुगतान नहीं करता है, उतना धन व्यक्ति का कालाधन कहलाता है. अतः कालाधन वैध तथा अवैध दोनों प्रकार के आय स्रोतों से प्राप्त किया जा सकता है. चूंकि आय के अधिकाँश वैध स्रोत राज्य को ज्ञात होते हैं, उन पर प्रायः आयकर ले लिया जाता है. इस कारण कालेधन के मुख्य स्रोत अवैध आय के स्रोत होते हैं. स्वतन्त्रता के समय केवल व्यवसायियों के पास कालाधन था जिसके अधिकाँश स्रोत वैध व्यवसाय से आय थे किन्तु उन पर आय कर न दिए जाने के कारण यह कालेधन की संज्ञा पाता था. इसलिए तत्कालीन काला धन उतना काला नहीं था जितना कि देश में आज का काला धन है क्योंकि आज का काला धन अवैध आय स्रोतों से प्राप्त होता है. व्यवसायियों के पास उपलब्ध काला धन उनके व्यवसाय में लगा रहता है इसलिए उसका उत्पादक उपयोग होता है, जबकि अवैध आय स्रोतों से प्राप्त काला धन बहुधा किसी उत्पादक उपयोग में नहीं लगाया जाकर किसी अन्य काले धंधे में लगाया जाता है. अतः आज का काला धन देश की राजनीति, सामाजिक व्यवस्था और अर्थ व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;स्वतन्त्रता के लगभग २० वर्षों तक राजनेता राजनैतिक दलों के उपयोग के लिए व्यवसायियों के काले धन में से सीधे धन प्राप्त करते थे, प्रशासकों को इसमें सम्मिलित नहीं किया जाता था और अधिकाँश राजनेता भी इसमें व्यक्तिगत भागीदारी नहीं रखते थे. अतः यह काला धन केवल राजनैतिक दलों का होता था. इस कारण से राजनेता राज्यकर्मियों पर अपना नियंत्रण बनाये रखते थे जिससे उनका भृष्ट होना दुष्कर था. व्यवसायियों के पास काले धन का लाभ कुछ राज्यकर्मियों ने भी उठाया जिससे वे भी उसके हिस्सेदार बनने लगे और कालांतर में इसके अधिकाँश भाग के स्वामी हो गए. राज्यकर्मी इस काले धन का उपयोग अपने वैभव भोगों के लिए किया करते थे. उन पर राजनेताओं के नियंत्रण का भयबना रहता था.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इंदिरा गाँधी के शासन काल में राजनेताओं ने प्रशासकों को जनता से काला धन कमाने और उन्हें देने के लिए विवश करना आरम्भ कर दिया जिससे राजनेता और राज्यकर्मी जनता से लूटे गए कालेधन के परस्पर भागीदार बन गए, और कर्मी नेताओं के नियंत्रण से मुक्त हो गए. इस मुक्ति और नेताओं द्वारा काला धन कमाने के प्रोत्साहन से राज्यकर्मी भृष्टतर होते गए और वे निर्विघ्न जनता का शोषण करने लगे जो आज तक चल रहा है. इस प्रकार देश के अधिकाँश काले धन के स्वामी राजनेता और राज्यकर्मी बन गए, तथापि व्यवसायी काला धन कमाने के लिए बदनाम बने रहे. आज के व्यवसायी जो भी काला धन कमाते हैं उसका अधिकाँश भाग राज्यकर्मियों के माध्यम से राजनेताओं के पास पहुँच जाता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt; &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;देश में काले धन के अर्थ-व्यवस्था पर नियंत्रण के लिए अनेक वैधानिक प्रावधान किये गए हैं जो केवल व्यवसायियों पर लागू किये जाते हैं, और काले धन के वास्तविक स्वामी – राजनेता और राज्यकर्मी, इन वैधानिक प्रावधानों से मुक्त ही बने रहते हैं. वस्तुतः ये प्रावधान राजनेताओं तथा राज्यकर्मियों द्वारा ही इस चतुराई से बनाये जाते हैं वे स्वयं इनसे दुष्प्रभावित न हों.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;यद्यपि कालेधन का आकलन किसी भी प्रकार से संभव नहीं है, तथापि कुछ विशेषज्ञों के अनुसार भात में कालेधन का परिमाण १,०००,००० मिलियन रुपये है. आज भी व्यवसायियों का काला धन उनके उद्योग धंधों में लगा रहता है जिससे उसका उत्पादक उपयोग हो रहा है. किन्तु राजनेताओं और राज्यकर्मियों के काले धन का बड़ा भाग विदेशी बैंकों में जमा किया जा रहा है. अतः इसका लाभ देश को न होकर विदेशों को हो रहा है. राजनेता इसका उपयोग राजनैतिक सत्ता हथियाने के लिए और राज्यकर्मी इसका उपयोग आर्थिक सत्ता हथियाने के लिए कर रहे हैं.&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-7776620772041353618?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7776620772041353618'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7776620772041353618'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_7477.html' title='काले धन की कालिख'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-4-pCtkNrFHw/TiP7EGGRTlI/AAAAAAAAAq0/DB4rhkBnJJ0/s72-c/RBI_0.gif.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-5747442655417388748</id><published>2011-07-18T01:46:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T02:05:37.545-07:00</updated><title type='text'>आतंक की राजनीति …..</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-8FbfrmzlMeI/TiPzUHetopI/AAAAAAAAAqs/XlRO3rismAM/s1600/terrorism-2.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 231px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-8FbfrmzlMeI/TiPzUHetopI/AAAAAAAAAqs/XlRO3rismAM/s400/terrorism-2.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630611486074053266" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;मुम्बई पर फिर से आतंकी हमला हुआ और हमारे हुक्मरान २६/११ हमले के वक्त जारी अपनी गीदड़ भभकियों को भूल गए……. फिर से ऐसा हमला हुआ तो हम आर पार की लड़ाई लडेंगे ? उल्टा हमारे ‘राजकुमार ‘ फरमा रहे हैं कि ऐसे हमले रोके नहीं जा सकते . सुरक्षा एजेंसियों को शाबाशी भी दे डाली और कहा कि बस एक प्रतिशत ही रह गए हैं आतंकी हमले. ‘राजकुमार’ के गुरूजी ‘दिग्गी मियां’ तो और भी दो कदम आगे बढ़ गए और बोले कि पाकिस्तान के मुकाबले तो हमारे यहाँ आतंक बहुत मामूली है- लगे हाथ आर. एस.एस व् हिन्दू संगठनों पर भी उंगली तान दी. इसे कहते हैं आतंक की राजनीति …. लोग मरते हैं, मरते रहे…. वोट बैंक फलता फूलता रहे !&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;हमारा पडोसी हमारे खिलाफ ‘ परोक्ष युद्ध ‘ छेड़े हुए है.. और हम अमन के कबूतर उड़ा रहे हैं. वे देश की वाणिज्य राजधानी पर ‘हमला ‘ कर हमारी अर्थ व्यवस्था को तहसनहस करने की फिराक में है और हम वार्ता का राग अलाप रहे हैं. पाक हमारे विरुद्ध मुसलसल जेहाद छेड़े हुए है. इस्लामिक स्टेट का मुख्य उदेश्य ‘ शरियत के अनुसार तब तक जेहाद जारी रखना है , जब तक निजाम ए मुस्तफा कायम न हो जाए. अर्थात इस्लाम का राज्य कायम हो जाए ! पश्चमी देशों ने इस तथ्य को भली भांति समझ लिया और ‘जेहादी तत्वों’ पर सख्त निगरानी की नीति अपना ली. अमेरीका पर ९/११ के बाद दूसरा जिहादी हमला सफल नहीं हो पाया.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जापान विश्व का एक मात्र देश है जहाँ ‘ कोई जेहादी परिंदा पर भी नहीं मार सकता ‘ जापानियों को पूरा विशवास है ! जापान ने ‘जेहादियों ‘ पर अपने देश में पूर्ण प्ररिबंध लगा रक्खा है. जापान में इस्लाम के प्रचार प्रसार पर कड़ा प्रतिबन्ध है.जापान में अब किसी मुसलमान को स्थाई रूप से रहने की इज़ाज़त नहीं दी जाती. जापान में मात्र २ लाख मुसलमान हैं जिन्हें नागरिकता दी गई है और वे जापानी भाषा में ही अपने मज़हबी कार्य करते हैं. इनमें भी अधिकाश विदेशी कंपनियों के कर्मचारी है. किन्तु आज कोई भी कंपनी किसी मुसलमान को यदि जापान भेजती है तो उसे इज़ाज़त नहीं दी जाती यहाँ कोई इस्लामी मदरसा नहीं खोला जा सकता. कारन ! जापानी मानते हैं की मुसलमान कट्टरवाद के पर्याय हैं. जापान में ‘पर्सनल ला ‘ जैसा कोई शगूफा नहीं. यदि कोई जापानी महिला किसी मुसलमान से शादी कर ले तो उसका सामाजिक बहिष्कार किया जाता है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;टोकियो विश्व विद्यालय के विदेश अध्ययन के अध्यक्ष कोमिको यागी के अनुसार …जापानियों की यह मान्यता है कि इस्लाम संकीर्ण सोच का मज़हब है.&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इसे कहते हैं ‘ आतंक के खिलाफ जीरो टालरेंस ‘ हमारे यहाँ सब इसका उल्टा है. मुसलमानों के लिए ‘शरिया’ के अनुसार अलग से ‘ पर्सनल ला’ हैं. मदरसों को खुले दिल से सरकारी सहायता दी जाती है जहाँ ‘ जेहाद ‘का पाठ पढाया जाता है. यदि कोई आतंकी मुसलमान पकड़ा जाता है तो हमारे दिग्गी मियां जैसे सेकुलर शैतान ‘भगवा आतंक ‘ का राग अलापने लगते हैं .. वैसे भी हमारे ‘सिंह साहेब’ तो देश की सभी सुख सुविधाओं पर मुसलमानों का पहला हक़ मानते हैं…. मुंबई के ७/१३ के हमले के बाद तो ऐसा प्रतीत होता है कि हमारी नपुंसक सरकार ने आतंकी तत्वों के आगे हथियार ही डाल दिए हैं. जब पिछले पकडे गए सजा याफ्ता आतंकियों को सजा / फांसी पर चढाने की हिम्मत नहीं तब ये सेकुलर शैतान सरकार और आतंकी पकड़ कर क्या उनका अचार डालेगी ?&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-5747442655417388748?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/5747442655417388748'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/5747442655417388748'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_740.html' title='आतंक की राजनीति …..'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-8FbfrmzlMeI/TiPzUHetopI/AAAAAAAAAqs/XlRO3rismAM/s72-c/terrorism-2.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3204856766075043052</id><published>2011-07-18T01:01:00.000-07:00</published><updated>2011-07-18T01:04:08.735-07:00</updated><title type='text'>अनशन के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे अन्ना</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/-7syUSAHwc9k/TiPo7IbrxFI/AAAAAAAAAqY/ouTFl-tV40g/s1600/anna-hazare.JPG"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 308px; height: 330px;" src="http://1.bp.blogspot.com/-7syUSAHwc9k/TiPo7IbrxFI/AAAAAAAAAqY/ouTFl-tV40g/s400/anna-hazare.JPG" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630600061716776018" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;नई दिल्ली। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी अन्ना हजारे ने रविवार को कहा कि वे 16 अगस्त से प्रस्तावित अपने आमरण अनशन को सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय का रुख करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अन्ना हजारे ने कहा, "सरकार का कहना है कि बाबा रामदेव के अभियान को जिस तरह से कुचला गया उसी तरह से वह उनके आंदोलन को भी कुचल देगी। क्या यह लोकतंत्र है अथवा तनाशाही है? हम सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में जाएंगे।"&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ज्ञात हो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव का आंदोलन गत चार-पांच जून की रात हुई पुलिस कार्रवाई के बाद समाप्त हो गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उन्होंने कहा, "एक लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक के पास प्रदर्शन करने का अधिकार है। इसलिए हम 16 अगस्त को अनशन पर बैठेंगे।"&lt;br /&gt;उल्लेखनीय है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सख्त लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर पर पांच दिनों का आमरण अनशन किया जिसके चलते सरकार को एक मसौदा समिति का गठन करना पड़ा। इस समिति में सरकार के पांच केंद्रीय मंत्री और सामाजिक संगठनों के पांच सदस्य शामिल हुए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;समिति के 10 सदस्यों ने एक सख्त लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए 30 जून तक कई बैठकें कीं, लेकिन दोनों पक्षों में कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद अन्ना हजारे ने घोषणा की कि यदि 16 अगस्त से पहले एक व्यापक लोकपाल विधेयक संसद में पेश नहीं किया गया, तो वे आमरण अनशन शुरू कर देंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3204856766075043052?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3204856766075043052'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3204856766075043052'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_18.html' title='अनशन के लिए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे अन्ना'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/-7syUSAHwc9k/TiPo7IbrxFI/AAAAAAAAAqY/ouTFl-tV40g/s72-c/anna-hazare.JPG' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-7486471501567557519</id><published>2011-07-17T13:13:00.000-07:00</published><updated>2011-07-17T13:16:49.973-07:00</updated><title type='text'>फेसबुक की मदद से बीमार पत्रकार के लिए इकट्ठा 60 हजार रुपए</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://3.bp.blogspot.com/-qaXvo2HFSjI/TiNDLEF9gTI/AAAAAAAAApM/Bfy5eeJRFaE/s1600/deepcp.jpg"&gt;&lt;img style="float:right; margin:0 0 10px 10px;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 331px;" src="http://3.bp.blogspot.com/-qaXvo2HFSjI/TiNDLEF9gTI/AAAAAAAAApM/Bfy5eeJRFaE/s400/deepcp.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630417816499618098" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;कानपुर।। एक बीमार पत्रकार की मदद के लिए कुछ पत्रकारों ने सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर लोगों से मदद की अपील की और देखते ही देखते करीब 60 हजार रुपए एक हफ्ते के अंदर एकत्र हो गए, जो उन्हें सौंप दिए गए।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कानपुर के एक दैनिक के पत्रकार दीपचन्द पांडे को कैंसर हो गया और वह टाटा मेमोरियल मुंबई में इलाज करा रहे थे और करीब तीन लाख रुपए खर्च कर चुके थे। इसी बीच उन्हें मालूम हुआ कि उनकी 21 साल की बीए में पढ़ने वाली बेटी शिखा को 'ब्लड कैंसर' हो गया है। इसके बाद पांडे ने अपना इलाज अधूरा छोड़कर अपनी बेटी का इलाज शुरू करा दिया, लेकिन पैसे की कमी आड़े आने लगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;पांडे और उनकी बेटी दोनों को कैंसर होने और आर्थिक स्थिति खराब होने की जानकारी जब कुछ साथी पत्रकारों को लगी तो उन्होंने उनके इलाज में मदद की खातिर सोशल नेटवर्किंग साइड फेसबुक पर उनकी फोटो के साथ लोगों से मदद करने की अपील की और देखते ही देखते देश-विदेश से लोग मदद के लिए आगे आने लगे। इस प्रकार करीब 60 हजार रुपए एकत्र हो गए।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-7486471501567557519?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7486471501567557519'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7486471501567557519'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/60.html' title='फेसबुक की मदद से बीमार पत्रकार के लिए इकट्ठा 60 हजार रुपए'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/-qaXvo2HFSjI/TiNDLEF9gTI/AAAAAAAAApM/Bfy5eeJRFaE/s72-c/deepcp.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-8187404361227404123</id><published>2011-07-17T12:50:00.000-07:00</published><updated>2011-07-17T12:52:05.395-07:00</updated><title type='text'>भारत का महाशक्ती बनना तय है - सतपाल महाराज</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-C2EpLhhj-7E/TiM9XfTR9UI/AAAAAAAAApE/0c5GUguSDos/s1600/maharaji_new%2Bphoto.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 224px; height: 320px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-C2EpLhhj-7E/TiM9XfTR9UI/AAAAAAAAApE/0c5GUguSDos/s320/maharaji_new%2Bphoto.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5630411432891905346" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;वो उत्तराखंड की राजनीति में अपना वर्चस्व रखते हैं और राज्य को नयी दिशा देने का श्रेय भी उन्हें जाता है। वो उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के मुख्य संरक्षक के रूप में नयी विचार धारा को आगे बढ़ाने वाले हैं। इतना ही नहीं 1994 में उन्होंने रामपुर तिराहा में हुये जघन्य अत्याचार को देख कर 350 किमी की शहीद श्रदांजलि पद यात्रा की और राजनीति में पर्दापण किया। इन्होंने रेल मंत्रालय और वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में राज्यमंत्री के पद पर अपनी सेवायें दीं , ये हैं भारत को विश्व में महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का सपना देखने वाले सतपाल जी महाराज ।&lt;br /&gt;ये कांग्रेस के उत्तराखंड की पौढ़ी लोकसभा सीट से सांसद है। उनसे बात की हमारे संवाददाता सतीश आर्या ने। प्रस्तुत है। बात चीत के कुछ खास अंश ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कांग्रेस ने आपको पौड़ी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है कैसा लग रहा है।&lt;br /&gt;अच्छा लग रहा है। एक बार फिर क्षेत्र की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बतौर पालीटीशियन आपके द्वारा पौड़ी की जनता के लिए अब तक किए जाने वाले कार्य।&lt;br /&gt;पौड़ी क्षेत्र की जनता के लिए हमने अनेकों कार्य करवाए है। बहुत सी योजनाएं लागू कराई जिनमें शहीदों के आश्रितों को नौकरियां, वृद्धावस्था पेंषन, मेडिकल सुविधाए, यातायात की सुविधाएं आदि शामिल हंै। शहीदों की स्मृति में नारसन में एक शहीद स्मारक का निर्माण भी कराया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत किस तरह से की। आप पहली बार कब सांसद चुने गये।&lt;br /&gt;मैने उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए आंदोलन कारियों की सर्वोच्च संस्था उत्तरांचल संयुक्त संघर्ष समिति में श्री इंद्रमणि बकाड़ी के साथ मैने मुख्य संरक्षक के नाते सड़कों पर लड़ाई लड़ी। मै 1996 में पहली बार सांसद चुना गया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एक राजनेता के रूप में आपका सबसे बड़ा सपना, जो आप सच करना चाहते हो।&lt;br /&gt;अपने देश भारत को विश्व भर में महाशक्ति राष्ट्र के रूप में देखने का। जहां पर हर धर्म और जाति के लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलें।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तराखंड को राज्य का दर्जा कब प्राप्त हुआ। इसमें आपकी भूमिका कैसी रही।&lt;br /&gt;उत्तराखंड को राज्य का दर्जा 1997 में मिला। 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी.देवगौड़ा से षिफारिष की और पुनः 1997 में इंद्रकुमार गुजराल जी से षिफारिष की। जिन्होंने लालकिले की प्राचीर से उत्तराखंड राज्य की घोषणा की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;किस प्रधान मंत्री के कार्यकाल में उत्तराखंड को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।&lt;br /&gt;प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल जी के कार्य काल में।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;उत्तरांचल को उत्तराखंड में बदलने का कोई विषेष कारण नाम बदलने का एलान किस राजनेता ने किया।&lt;br /&gt;कोई विशेष कारण नही रहा। यह देश के उत्तर भाग में होने की वजह से उत्‍तराखण्‍ड रखवाया गया। इसकी घोषणा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रथक राज्य बनाने को लेकर 1994 में हुए रामपुर तिराहा संघर्ष से आपके जीवन में कैसा प्रभाव पड़ा।&lt;br /&gt;उत्तराखंड को प्रथक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए बहुत संघर्ष पड़ा। हमने लाखों लोगों में जागृति पैदा की। इन आन्दोलनकारियों पर रामपुर तिराहा मुजफ्फरपुर में हुए जघन्य अत्याचार से मेरा दिल दहल उठा। हमने आन्दोलन को तेज किया। वहां शहीद हुए अनेको निरीह आन्दोलनकारियों के परिवारों की आजीविका का प्रबन्ध किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपकी शहीद श्रंदाजलि पद यात्रा कैसी रही। कितने किलोमीटर का सफर रहा।&lt;br /&gt;सन् 1995 में गोपेष्वर से रामपुर तिराहा तक शहीद श्रद्धान्‍जली पद यात्रा की जो अच्छी रही। इससे प्रदेश सरकार की भी नीदें उड़ गयी। यह 350 किमी का सफर था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;केन्द्र में रेल मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद अपने क्षेत्र की जनता के लिए क्या किया।&lt;br /&gt;रेल मंत्रालय का कार्यभार सभालने के बाद मैने कई शहीदों के आश्रितों को नौकरीयाँ दिलवायी। इसके साथ ही रेलवे आउटसोर्सिंग एजेन्सियों की स्थापना तथा कम्प्यूटरीकृत रेल आरक्षण का विस्तार रेलवे के लिए विभिन्न समितियों व जोनल रेलवे परामर्शदात्री समिति का निर्माण कराया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;वित्तमंत्री के रूप में आपने कौन सी सुविधाएं प्रदेश की जनता को दी।&lt;br /&gt;वित्तमंत्री के रूप में मैने अपने क्षेत्र की माता बहनों के लिये बीमा योजना लागू करवायी, यह पूर्ण पहाड़ी महिलाओं के लिए थी। पूर्व सैनिकों का वेतन बढ़ाने का कार्य किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ऋषिकेष स्थापित दवाखाना (आईडीपीएल)की दषा दयनीय थी। क्या किया उसके लिए।&lt;br /&gt;ऋषिकेष स्थापित दवाखाना (आईडीपीएल) जो कई वर्षो से मरणासन्न पड़ा हुआ था उसके पुर्न संचालन के लिए हमने वित्त मंत्रालय से 9 करोड़ 80 लाख रूपये स्वीकृत करवाया। इससे लोगों को अपनी योग्यता और कौषल दिखाने का अवसर प्राप्त हुआ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपके द्वारा उत्तराखंड को औद्यौगिक पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने का कोई विशेष कारण।&lt;br /&gt;यह क्षेत्र औद्यौगिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा होने के साथ-साथ औद्यौगिक रोजगार न होने के कारण मैने उत्तराखंड को औद्यौगिक पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आपकी पत्नी अमृता रावत भी बीरोंखाल विधान सभा सीट से विधायक हैं, उन्होंने जनता के लिए क्या किया।&lt;br /&gt;उन्होंने भी क्षेत्र की जनता के लिये अनेकों सुख सुविधाएं दी है। एनडी तिवारी की सरकार में अमृता ऊर्जा बाल विकास राज्य मंत्री रहीं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राज्य के प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में आपका योगदान। उनके कार्यकाल के बारे में क्या कहेंगे।&lt;br /&gt;एनडी तिवारी जी के कार्य काल में बीस सूची कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का उपाध्यक्ष रहा। इस दौरान अखिल भारतीय स्तर पर राज्य को प्रथम स्थान मिला। जिससे केन्द्र सरकार के द्वारा विकास के लिए एक हजार करोड़ रूपये से बढ़कर चार हजार करोड़ रूपये मिले। तिवारी जी का कार्यकाल बहुत ही अच्छा रहा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सत्ताधारी भाजपा सरकार अपनी जीत पक्की करने का दावा कर रही है। क्या कहेंगे ।&lt;br /&gt;विरोधी लोग तो अपनी-अपनी गाते हैं । यह तो चुनाव बाद ही पता चलेगा। कि कौन कहां पर है। सत्ताधारी सरकार लाखों रूपये खर्च कर रही है, जनता हिसाब लेगी।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;क्या कांग्रेस की घोषणा पत्र मतदाताओं को रिझा पायेगा। खासकर गरीब जनता के लिए क्या योजनाएं है।&lt;br /&gt;शिक्षा के क्षेत्र में मेरी रणनीति तेजी से कार्य करेगी। क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से नवाजा जायेगा। गढ़वाल विष्वविघालय में कार्यरत अंषकालिक शिक्षकों के समायोजन एवं विनियमितिकरण की समस्याओं का समाधान किया जायेगा। इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;महिला आरक्षण के बारे में क्या कहेंगे।&lt;br /&gt;महिला आरक्षण जरुर लागू किया जायेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;चुनाव से पूर्व नेता कोरे वायदे करते है बाद में जनता को भगवान के भरोसे को छोड़ देते है।&lt;br /&gt;सभी नेता ऐसे नही होते हैं, यदि मैं ऐसा होता तो क्षेत्र की जनता से उतना प्यार नहीं मिलता जितना मुझे मिल रहा है। हम करने में विश्वास रखते है, कोरे वादे पर नहीं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;राहुल गांधी के बारे में आप क्या कहेंगे। क्या कांग्रेस नेतृत्व उन्हें प्रधानमंत्री बनायेगा या किसी और को।&lt;br /&gt;राहुल गांधी का भविष्य उज्ज्वल है और एक दिन वे राष्ट्र का मार्गदर्शन जरूर करेगें। फिलहाल कांग्रेस आला कमान क्या करता है यह समय बतायेगा।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आप युवा वर्ग से क्या अपील करना चाहेंगे।&lt;br /&gt;मै युवा वर्ग से अपील करता हूं कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग इस क्षेत्र, प्रदेष और देष के हित में अवष्य करें। मजबूत व स्थाई सरकार बनाने को कांग्रेस को वोट दें। जब केन्द्र में मजबूत सरकार बनेगी तो विकास और रोजगार के अनेकों अवसर खुलेंगे।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-8187404361227404123?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8187404361227404123'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8187404361227404123'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post_17.html' title='भारत का महाशक्ती बनना तय है - सतपाल महाराज'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/-C2EpLhhj-7E/TiM9XfTR9UI/AAAAAAAAApE/0c5GUguSDos/s72-c/maharaji_new%2Bphoto.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-2136642368885382762</id><published>2011-07-17T12:48:00.000-07:00</published><updated>2011-07-17T12:49:08.009-07:00</updated><title type='text'>नक्सलियों पर नकेल जरुरी है</title><content type='html'>क्रांति हमेशा भूखे पेटों से ज्वाला बन के निकलती है। और अपने हक को हासिल करने के लिए यदि वह कानून व्यवस्था को हाथ में लेकर खून बहाने से गुरेज न करे आश्‍चर्य नहीं करना चाहिए। विदेशों साम्यवादी चिंतक ने यह बात बहुत सोच विचार के बाद भले ही कही हो लेकिन अब यह अर्धसत्य बन के रह गया है। भारत में बढ़ रही नक्सली हिंसा विदेशी खतरों से ज्यादा चिंता जनक है। माओ के कथित अनुयायिओं व नक्सलियों पर नकेल की जरूरत बता रहे है - शैलेन्द्र चिंतक&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अब देश् के कई हिस्सों में लाल गढ़ गढ़ने में जुट गए है नक्सली संगठन। केन्द्र सरकार कभी इनसे निपटने के लिए कभी हवाई हमलों की घोषणा करती है तो कभी फैसले से पलट जाती है। अक्टूबर तक देश के कई हिस्सों में खून की होली खेल पुलिस व सुरक्षा बलों के जाबांज जवानों की बलि लेने वाले संगठनों से रियासत करना कायरता ही होगी। देश के गृहमंत्री पी चिदम्बरम्‌ के लिए यह परीक्षा की घड़ी है। साथ ही सोनिया गांधी व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के रवैए का भी खुलासा हो जाएगा कि इस प्रबलतम चुनौती से निपटने को वे कितनी तव्वजों देते है या यूं ही राजनीतिक स्टेटमेंटों के जरिए रक्षा व आक्रमण की सियासत कर आंतरिक सुरक्षा को चुनौती बने दुश्‍मन नम्बर एक को मनमानी की छूट मिलती रहेगी।&lt;br /&gt;इसे विडम्बना ही कहा जाए कि अब भारत को अपने पड़ोसियों पर अन्य राष्ट्रों से सामरिक खतरा इतनी बड़ी चिंता की बात नहीं है जितना देश के गद्दार नक्सलियों की गतिविधियां। राजनीतिक दलों व उनके नेता इन संगठनों के बचाव में आखिर क्यों खड़े है क्या राजनीति लाभ के लिए जवानों की जान की कीमत लगाना लोकतंत्र ही नहीं राष्ट्र के साथ धोखा नहीं है।&lt;br /&gt;दरअसल देश की आर्थिक तकनीकी वैज्ञानिक सामरिक एवं अन्य क्षेत्र में बढ़ती ताकत पाकिस्तान व चीन के पेट में जलन पैदा कर रही है। चन्द्रमा में पानी खोजने के कारनामे के बाद तो प‍‍श्चिमी मुल्क भी डाह रख रहे है। इसलिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अस्थिर करने व प्रगति के मार्ग पर बैरियर लगाने के लिए चीन पाकिस्तान बांग्लादेश नेपाल व अन्य देश इन संगठनों को मद्दत कर रहे है। अब तो माओवादियों व नक्सलियों के साथ मुस्लिम आंतकी संगठनों की साठगांठ भारत को आंतकवाद का ठिकाना बनाने का दुष्चक्र रचा जा रहा है। यही कारण है अचानक २००९ में नक्सली घटनाओं में इजाफा हो गया।&lt;br /&gt;सबसे बुरा हाल तो बंगाल का है। जहां इस संगठन का जन्म हुआ। बीते तीस सालों से नक्सली वारदातों पर मार्क्सवादी शासन के बीच दुरभि संधि के चलते अंकुष लगा था। लेकिन अचानक बुद्धदेव भट्टाचार्य की सरकार ने इन पर जब शिकंजा कसना शुरू किया (राजनीतिक कारणों से तो यहां पर खून का खेल शुरू हो गया। लालगढ़ व अन्य जगहों पर माओवादियों ने शासन व प्रषासन को खुली चुनौती देनी शुरू कर दी। हाल ही में एक थानाध्यक्ष की रिहाई के लिए पुलिस को माओवादियों की कथित सहयोगी बनी १५ महलाओं को छोड़ना पड़ा। राज्य सरकार यह घुटना टेकना अब भारी पड़ सकता है।&lt;br /&gt;बीते दिनों नक्सलियों ने झारखण्ड छत्तीसगढ़ बिहार आन्ध्र महाराष्ट्र एवं बंगाल में पुलिस व सुरक्षा बलों पर भारी हमला किया। ७२ पुलिस कर्मी एक माह में शहीद हो गए। इसके बाद भी इनके सफाए के लिए सख्त कार्यवाही नहीं की गई। जिससे नक्सलियों के हौसले सातवें आसमान पर है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आगाज - &lt;br /&gt;चीन से आयतित इस विचारधारा को चीनी महानायक माओत्से तुंग ने १९३४ में रोया था। १९६४ में सांस्कृतिक क्रांति के नाम पर इसे फैलाया गया। भारत की वामपंथी पार्टियों के आदर्ष भी माओ चाऊ इन लाई रहे। बाद में माकपा के उदय होने पर साम्यवादी की रूसी विचारधारा पनपी। लेकिन नक्सलपंथ की शुरूआत बंगाल के नक्सलबाड़ी (जिली दार्जिलिंग में १९६७ में हुई। ४२ सालों में इसके जड़े देश के ७५ फीसद भूभाग तक पंहुच गई। इसके संस्थापकों में कानपुर के मजदूर नेता व जूही कालोनी के निवासी रहे विनोद मिश्र भी थे। चारू मजूमदार एवं कानु सन्याल ने कृषि मजदूरों एवं भूमिहीनों को उनका अधिकार दिलाने के लिए इसकी शुरूआती की। तबसे इस संगठन को नक्सली व इससे जुड़े लोगों को नक्सलाइट कहा जाने लगा। अपने तीखे तेवरों व गरीबों बेसहारों सर्वहारा लोगों शोषितों किसानों व मजदूरों के बीच यह संगठन लोकप्रिय होता गया। बाद में शासन प्रशासन से टकराव के कराण इन्होंने हथियार उठा लिए। &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कारण &lt;br /&gt;आन्ध्र प्रदेश में तेलंगाना प्रदेश की मांग को लेकर व महाराष्ट्र मध्यप्रदेश उड़ीसा बिहार में संगम की गतिविधियां जारी हो गयी। धीरे-धीरे इसको राजनीतिक संरक्षण मिलने लगा। जिसका परिणाम यह हुआ यह संगठन मजबूत एवं बेलगाम होता गया। वांमपंथी नेताओं ने विदेशी ताकतों से इसका संबंध स्थापित करा दिया और आज यह भारत के लिए नासूर बन गया। आज यह संगठन आमजन के बीच दहश्‍ात का पर्याय बन चुका है। इसकी चाल चेहरा व चरित्र भी बदल गया है। पूर्वोतर यूपी असम मेघालय मणिपुर नागालण्ड कर्नाटक तमिलनाडु हरियाणा पंजाब तक इसका नेटवर्क सक्रिय हो चुका है। बंगाल में वो महज मार्क्सवादी काडरियों ने सत्ता का लाभ हुए सम्पन्नता छीनी। उनकी नीतियां व सिद्वांत अलग हैं और क्रियान्वयन अलग। आदिवासियों व भूमिहीनों की रोजी-रोटी पर डाका डाला गया। उद्योगपतियों से सांठगांठ का परिणाम नंदीगांव खेजरी सिंगूर जैसी जगहों पर बेघर किये जाने से नकसलियों के उकसाये में आदिवासियों ने प्रषासन के छक्के छुड़ा दिए। यही कारण है कि यहॉ पर माओवादियों को सहानुभूति मिल रही है। राजिनीतिक रोटियां सेंकना तो सियासी दलों की फितरत है ऐसे मे उनका इन संगठनों को अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष समर्थन देना देश के साथ गद्दारी सरीखा है। आज जयचंदों व मिर्जाफरों की फौज एकत्र है। ऐसे में भारत की एकता व अखंडता को चुनौती दे रहे लोगों से निपटने में सख्ती न करना मनमोहन सरकार की भारी भूल होगी।&lt;br /&gt;दूसरी ओर कई राज्यों की सरकारें अपने विरोधियों या सरकारी नीतियों की पोल खोल रहे लोगों को नकसली बताकर उनको जेल में ठूंस कर अमानवीय यातनाएं दे रहे है। इससे बजाय नक्सलियों को सहायता देने में कमी आने के लोगों में आक्रोश बढ़ने के कारण उन्हें क्षेत्रीय लोगों का समर्थन मिल रहा है। इसके कारण लोग अब समूह के रूप में हिसंक होकर फोर्स व पुलिस पर हमलावर हो रहे है। थानों चौकियों व सरकारी दफतरों में हमले बढ़ रहे है। जबसे पड़ोसी देश नेपाल में माओवादियों की सरकार बनी तबसे भारत में नक्सली वारदातें यकायक बढ़ गई।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सरकारी नीतियां - &lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सबसे अह्‌म सवाल यह है कि नक्सलियों को यह ताकत कौन और कैसे दे रहा है। स्थानीय स्तर पर इन्हें क्यों समर्थन मिल रहा है। स्थानीय खुफिया व पुलिस को इसकी भनक क्यो नहीं मिल रही। इनके आर्थिक व अन्य संसाधन कौन आर क्यों मुहैया करा रहा है। सिर्फ नक्सलियों को कोसने या निंदा करने से इस समस्या का हल होने से रहा। आखिर अचानक इस विचार धारा के प्रति आज की पीढ़ी में इतनी ललक क्यों है।&lt;br /&gt;कारण साफ है हमारे देश की वर्तमान सामाजिक आर्थिक राजनीतिक एवं धार्मिक स्थितियां ऐसी है कि जो देशवासियों में विभिन्न मुद्दों पर अलगांव पैदा कर रही है। सरकारी महकमों की कार्यप्रणाली कोढ़ में खाज का काम कर रही है। वांचितों को जब तक संवैधानिक व सामयिक हक नहीं दिया जाएगा यह आग बुझने से रही। गृहमंत्री पी चिदबरम्‌ की रणनीति भी किसी के पल्ले नहीं पड़ रही है। उनका कहना है कि सैन्य कार्यवाही नक्सलियों पर नहीं नक्सलवाद पर की जाएगी। अब उन्हें कौन समझाए कि नक्सलवाद का न तो चेहरा है न ही शरीर । आखिर किसी विचारधारा को कैसे खत्म कर देंगे चिदम्बरम्‌ साहब। उन्हें पता होना चाहिए कि जिस तरह समाज व्यक्तियों का समूह है। उसी तरह नकसलवाद भी व्यक्तियों द्वारा पोषित एवं परिचालित है। क्या किसी नक्सली को मारे बिना नक्सलवाद खत्म हो जाएगी। &lt;br /&gt;स्वयं देश्‍ा के प्रधानमंत्री गृहमंत्री व आला सुरक्षाधिकारी सैन्य संगठनों के जिम्मेदार पर्सन कह चुके हैं कि देश के पढ़े-लिखे लोग व बुद्धिजीवी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले शख्स भी नक्सलवाद से प्रभावित होकर उसको समर्थन दे रहे है। यदि यह सही है तो यह सरकार व मंत्रियों की कमजोरी व हमारे भ्रष्ट सिस्टम का असली चेहरा उजागर करता है। कागजी विकास के नाम जो नेताओं ठेकेदारों अफसरोंमाफियाओं ने डकारी उस पर आम जनता का हक था। उन्हें सुविधाओं के बदले जब बेइज्जती व यातना मिली तो मजबूरी मे उन्हें बागी बनना पड़ता है। इसका अर्थ यह है कि समस्या का हल हिंसा या सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल लेना सही है। देश की सुरक्षा व कानून से खेलने का किसी को हक नहीं है। लेकिन इन लोगों को इस हालत में धकेलने वाले लोगों को भी कोई हक नहीं है कि वे शासन-प्रशासन पर को चलाएं और अपनी जान बचाने के लिए आमजन या सुरक्षा बलों व पुलिस के जवानों की जान का सौदा करते रहे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहां गया सौ दिन का एजेण्डा &lt;br /&gt;पुनः सत्ता पाते ही संप्रग के नेता व मंत्रीगण मदमस्त हो गए। अवाम को बेवकूफ समझने लगे। तमाम चंटघंटियों को मंत्रालय मिल गए। आनन-फानन में मनमोहनी तान झेड़ दी गई और सौ दिन का एजेण्डा घोषित कर दिया गया। इस ऐजेण्डे के जरिए पब्लिक को लुभाने व झांसे में डालने का उपक्रम शुरू हो गया। इन सौ दिनों में विभिन्न मंत्रालयों ने कुछ लक्ष्य विकास के तय किए थे। इसके अलावा देश की आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए भी नीति बनी थी। जिससे नक्सलवाद को देश का एक नम्बर का शत्रु घोषित किया गया था। इससे निपटने के लिए नक्सलवाद की मेरूदण्ड को तोड़ कर उसके नेटवर्क को ध्वस्त करने का वायदा गृहमंत्री ने किया था। पर सौ दिन क्या दो सौ दिन गुजर गए हालत बद से बदत्तर हो गई और आज भी वाग्विलास जारी है। नक्सल प्रभावित राज्यों व जिलों की सरहदों में पुख्ता सुरक्षा इंतजाम की बात हवा हवाई साबित हुई। प्रभावित इलाकों के थानों को आधुनिक संसाधनों से लैस नहीं किया जा सका। संचार व मानीटरिंग संसाधन बाबा आदम जमाने के है। यहां तक गाड़ियां असलहें सुरक्षा कवच चिकित्सीय सुविधाएं तक स्तरीय नहीं है। बारूदी सुरंगों से जूझने प्रोरेक्षन के संसाधन स्थानीय खुफिया व मुखबिर तन्त्र भी दुरूस्त नहीं हो सका। ऐसे नक्सलियों के सफाए या उनसे कारगर ढंग से निपटने की बात सोचना भी हास्यास्पद है। नक्सलियों से निपटने के लिए देश में चार स्पेशल सुरक्षा गार्ड ट्रेनिंग सेन्टर खोलने की घोषणा हवा-हवाई साबित हुई।&lt;br /&gt;बीते तीन माह में सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही पचास से ज्यादा पुलिस व सुरक्षा बल के जवान खेल खेल रहे। कभी गृहमंत्री कहते हैं कि राज्य सरकारें अपने सूबे की आंतरिक सुरक्षा स्वयं करें वहीं इसके जिम्मेदार है तो कभी कहते है कि केन्द्र पूरी मद्दत को तैयार है। वारदात होने पर सिर्फ मगरमच्छी आंसू बहा कर बड़े-बड़े दावे करके कर्तव्य की इतिश्री कर ली जाती है। &lt;br /&gt;सबसे ज्यादा बंटाधार तो पूर्व गृह मंत्री शिवराज पाटिल और उनके राज्यमंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल व शकील अहमद ने किया। अपने सीनियर की तरह ये मंत्री नक्सलियों से निपटने के लिए अपनी जुबान का प्रयोग करते रहे। न तो ठोस रणनीति बनाई और न ही कहीं सुरक्षा पुख्ता की गई। सभी दोष राज्य सरकार के सिर मढ़ दिया जाता रहा। पूर्व गृह मंत्री ने तो नक्सलियों को भारतीय बच्चा बताते हुए उन्हें रियायत देते रहे। दूसरे आंतकवादी संगठनों की तरह सख्त कार्यवाही से बचते रहे। देश की सुरक्षा चुनौती देने वाले दो संगठनों मुस्लिम आंतकवादी संगठन व नक्सलियों के साथ एक ही अपराध पर दो तरह का व्यवहार नक्सलियों को बढ़ावा दे रहा। वाद नक्सलियों व माओवादियों को हथियार छोड़ राष्ट्र की मुख्यधारा में जोड़ने की कवायद में इनाम दिए जाने की घोषणा ने फजीहत कराई। हाल ही में नक्सलियों पर हवाई हमलों की घोषणा की गई बाद में प्रधानमंत्री मुकर गए। यानी केन्द्र सरकार के सरकारी विभागों व मंत्रालयों के बीच अभी भी संवादहीनता है। तभी बचकानी घोषणएं होती है और बाद में उसकी वापसी हो जाती है।&lt;br /&gt;आज भारत को मुस्लिम आंतकवाद से ज्यादा वामपंथी आतंकवाद से जूझना पड़ रहा है। इन्हें कहीं न कहीं माकपा माले तृणमूल कांग्रेस राष्ट्रीय कांग्रेस व उसके अन्य सहयोगी दलों का समर्थन मिलता रहा है और आरोप भी लगे है। ऐसी दशा में प्रभावित इलाके के लोग सुरक्षा के लिए क्या अमेरिका या रूस से गुहार करें १९७२ में आन्ध्र के दो नक्सली नेताओं भूभय्या व उसके साथी को फांसी दी गई। तब वहां पर नक्सलवाद पर नकेल लग गई थी। लेकिन इधर तथा कथित मानवाधिकारों के संरक्षक धर्मनिरपेक्ष एवं सरकारी दमन के विरोधी तत्वों व संगठनों की बढ़ती सक्रियता की चिंता का सबब है। क्योंकि जो लोग देश्‍ा के सुरक्षा कर्मियों पुलिस आम जनता सरकारी विभागों को निशाना बना रहे है निर्मम कत्ल कर रहे है आतंक फैलाकर खून से धरती लाल कर रहे है वे रहम के हकदार नहीं।&lt;br /&gt;देश्‍ा इस समय जिस दौर से गुजर रहा है इस समय राजनीतिक दुराव अन्तविरोधों को दरकिनार कर भारत विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देकर देश्‍ा का नम्बर वन दुष्मन बने नक्सलियों की कमर तोड़ने के लिए सभी को एक साथ खड़ा होना चाहिए। शोषण या हक न मिलने का रास्ता भी खोलना पड़ेगा वरना यह विषवेल अमरवेल बन देष की गर्दन को कसता रहेगा।&lt;br /&gt;ये आंकड़े सरकारी है। स्थानीय लोगों की मानी जाए तो वारदातों की संख्या, हताहतों की संख्या, ज्यादा हो सकती है। क्योंकि मृतकों की जब तक लाष नहीं मिलती या सबूत नहीं मिलता तब तक उन्हें मृतक घोषित नहीं किया जा सकता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-2136642368885382762?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2136642368885382762'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2136642368885382762'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/07/blog-post.html' title='नक्सलियों पर नकेल जरुरी है'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-7212972025735112510</id><published>2011-05-18T01:53:00.000-07:00</published><updated>2011-07-20T07:07:39.398-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='स्‍पीक एशिया'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Speak Asia'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='speakasia'/><title type='text'>घबराएँ न स्पीक एशिया के पैनलिस्‍ट</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://4.bp.blogspot.com/-_g1ffL2fYLI/TibhJmzhi6I/AAAAAAAAAtg/MZ1GZOzUhKs/s1600/speak-asia-online_1.jpg"&gt;&lt;img style="float:left; margin:0 10px 10px 0;cursor:pointer; cursor:hand;width: 400px; height: 161px;" src="http://4.bp.blogspot.com/-_g1ffL2fYLI/TibhJmzhi6I/AAAAAAAAAtg/MZ1GZOzUhKs/s400/speak-asia-online_1.jpg" border="0" alt=""id="BLOGGER_PHOTO_ID_5631435939225111458" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;एशिया की सबसे बडी Survey Company Speak Asia  के अधिकारियों ने Mumbai में हुयी एक प्रेस वार्ता में बताया कि  बीते 5 दिनों से न्यूज़ चैनल T.R.P. और व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा के लालच में १७ लाख लोगों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहे हैं , एक न्‍यूज चैनल ये सारी झूठी अफवाहें स्पीक एशिया के खिलाफ इस लिए फैला रहा है, क्यों की जल्दी ही वो भी अपना नया सर्वे ग्रुप उतार रहा है , इसी लिए वो व्यावसायिक लाभ और T.R.P.  के लिए स्पीक एशिया जैसी बड़ी और भरोसेमंद  कंपनी पर चोट कर रहा है, जब की बाजार में सर्वे करवाने वाली ऐसी कम से कम एक दर्जन कम्पनियां हैं ,और कई तो ऐसी है जिनके मालिक तक का कोई अता पता नहीं है, वास्तव में ये न्यूज़ चैनल्स अपने व्यावसायिक फायदे के लिए किसी भी हद  तक गिर सकते हैं , और अब इन पर सरकारी लगाम होना बहुत जरुरी है , इन न्यूज़ चैनलों के पास लोगों की तमाम समस्यों को सरकार तक  पहुंचने के लिए ५ मिनट तक नहीं है , लेकिन स्पीक एशिया के खिलाफ लगातार 5 दिनों से एक ही न्यूज़ चलाई जा रही  है,&lt;br /&gt;इन न्यूज़ चैनलों का कहना है की Bata , Nestle और ICICI जैसी बड़ी कंपनियां स्पीक एशिया के साथ नहीं जुडी हैं. लेकिन Reebok , Adidas ,Thomas Cook , Levis , IFB , Gitanjali , Provogue जैसी कंपनियों ने GEN X&lt;br /&gt; बाजार में पिछले ३ दिनों में इतना व्यापार किया है की ,उपभोक्ताओं को माल की डिलीवरी करने में इन्हें कई महीनों का वक़्त लगेगा. और ये कंपनियां अगर स्पीक एशिया से जुडी नहीं हैं तो ये  वहां क्या कर रही थी।&lt;br /&gt;ये सारा बवेला तब उत्पन्न हुआ जब स्पीक एशिया के कुछ धुरंदरो और एक न्यूज़ चैनल के कुछ लोगो के बीच किसी बात को ले कर गरमा गरम बहस छिड गयी, और स्टार न्यूज़ ने इसे ब्रेकिंग न्यूज़ बना डाला।&lt;br /&gt;ये पूरी न्यूज़ के पीछे क एमएलएम ग्रुप है इसने इस न्यूज़ को चलने के लिए को पैसे दिए हैं इसके लिए कुल १ करोड़ १७ लाख रुपये  दिये गये हैं।&lt;br /&gt;स्‍पीक एशिआ के अधिकारियों ने कहा कि आप बिलकुल न घबराएँ और स्पीक एशिया के साथ बने रहें, और ऐसे न्यूज़ चैनल्स को बिलकुल भी  T.R.P.  न देते हुए देखना बंद कर दें।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-7212972025735112510?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7212972025735112510'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7212972025735112510'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2011/05/blog-post.html' title='घबराएँ न स्पीक एशिया के पैनलिस्‍ट'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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होमवर्क नहीं किया था। उधर टीचर का भय था और घर में अकारण रूकने पर मां के सवालों की चिंता थी।&lt;br /&gt;ऐसी घटनाएं आज के बच्चों की भावनात्मक स्थिति से अवगत कराती हैं कि किस मनोदशा से गुजर रहे है ये बच्चे। आज के जेट युग में भी से बच्चे समझ नहीं पाते कि अपनी भावनाओं को किस तरह हैंडल करें जबकि आज के बच्चों का आईक्यू स्तर पहले से कहीं ज्यादा है ओर उन्हें पैरेन्ट्स का भी पूरा सहयोग है। आज के माता-पिता की भी पूरी कोषिष होती है कि इनके बच्चे हर प्रकार से समृद्ध हों ताकि आज के इस प्रतियोगी माहौल में खुशी सामंजस्य बैठा सकें। किन्तु ऐसा हो नहीं पा रहा है बच्चे भावनाओं के बहाव में बह जाते है। इनमें दूसरे की भावनाओं को समझने अनुकूल व्यवहार अथवा सहयोग की योग्यता की कमी देखी जा रही है। साथ ही बच्चों में भविष्य के प्रति निष्चिंतता भी नहीं है और ना ही वे उत्साही व आशावादी रह गए है।&lt;br /&gt;किश्‍ाोरावस्था मे कभी-कभी उनके जीवन में एक शून्यता सी आ जाती है। क्या चाहते है क्या करना चाहिए जैसी तमाम जगहों पर उनका दृष्टिकोण नकारात्मक ही रहता है। परिणाम कैरियर व पढ़ाई प्रभावित होती है और साथ ही प्रभावित होते है परस्पर व्यक्तिगत रिश्ते । यही वजह है कि आज भावनात्मक बौद्धिकता या इमोषनल इंटेलिजेंस (ईक्यू का महत्व बढ़ रहा है बल्कि इसे आईक्यू से ज्यादा महत्वपूण माना जाता है। अतः उन्हें सही तरीके से हैंडल करना जरूरी है। अध्ययनों के अनुसार पैरेन्ट्स बच्चों की इमोशनल इंटेलिजेन्स के सही विकास में योगदान दे सकते है। एक समाचार पत्र में प्रकािशत तथ्यों के अनुसार १९७० में किए गए कई एक परीक्षणों के वैज्ञानिक प्रमाण इस तथ्य को उजागर करते है कि जन्म के बाद शुरू के १८ महीनों में ब्रेन के इमोषनल विकास को सेट करते है। अतः बच्चे के ईक्यू के विकास पर शुरूआत से ही ध्यान देना चाहिए। सही विकास के लिए जरूरी है कि कुछ बातों पर आरंभ से ही ध्यान दिया जाए।&lt;br /&gt;कहते है बच्चा आपकी बात सुनने में भले ही चूक जाएं, किन्तु व्यवहार अपनाने में देर नहीं करता। आप अपनी विभिन्न भावनाओं जैसे - ईर्ष्या क्रोध खुशी उल्लास निराशा अवसाद या पीड़ा की स्थिति में कैसा व्यवहार करते है या दूसरों के प्रति कैसी भावना रखते है। वैसा ही व्यवहार बच्चा भी स्वतः ही करने लगता है। उसे सिखने या बताने की जरूरत नहीं है देखा जाए तो बड़े होने पर अन्य भावनाओं से ज्यादा निराषा कुंठा जैसी भावनाओं का सामना करना पड़ता है और इस निराशा या अवसाद की पीड़ा बच्चों से हैंडल नहीं होती।&lt;br /&gt;इनके प्रति बचपन से ही सावधान रहना चाहिए। बच्चे की मांग पूरी करने के बजाए कभी-कभी ना भी कहें ताकि बड़े होने पर निराशा उसके लिए कोई अनजानी भावना न रह जाए। आज परिवार छोटे है ऐसे में बच्चे की मनोदशा को सपोर्ट करने के लिए हर वक्त पेरेन्ट्स उपलब्ध नहीं हो पाते। अतः उनका भावनात्मक विकास ऐसा हो कि हर दुविधापूर्ण या प्रतिकूल स्थिति में भी वे सही दिशा चुन सके। टूटने के बजाए आत्मविष्वास से सही कदम उठाएं व जिम्मेदार बनें। कभी-कभी बच्चों को परस्पर जिम्मेदार बनाना भी जरूरी है ताकि वे एक दूसरे की भावनाओं को निकट से समझें व उनसे डील करना सीखें। ऐसा माहौल बनाएं कि वो अपनी भावनाओं को खुले मन से आपके सामने भी व्यक्त कर सकें। जो कुछ भी वे महसूस कर रहे है उनकी भावनाओं को मैच्योर तरीफ से लें।&lt;br /&gt;बच्चों के लिए खेलना जरूरी है। प्रायः ये माना जाता है कि खेल कूद शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा है किन्तु शायद कम लोग ही इस बात पर ध्यान देते है कि खेल कूद के माध्यम से भावनात्मक विकास में सहयोग मिलता है। इस दौरान क्रोध ईर्ष्या निराशा लालच जैसी भावनाओं से हर बच्चे को कभी न कभी गुजरना ही पड़ता है। कोई भी बच्चा अकेला नहीं खेलना चाहता उसे साथियों की जरूरत होती है। इसलिए वो अपनी भावनाओं को नियंत्रित कर खेल का आनंद उठाता है। देखने में भी आता है कि यदि किसी कारणवश दो बच्चे झगड़ते है तो कुछ समय बाद उनमें किसी न किसी प्रकार आपसी समझौता भी हो जाता है।&lt;br /&gt;भावनात्मक विकास के लिए बच्चों को एक अलग व्यक्ति के रूप में देखना व समझना भी जरूरी है। उनके मित्र बनिए उनके साथ उनकी आकांक्षाएं महत्वकांक्षाएं व ध्येय शेअर कीजिए। उन्हें महसूस कराइए कि वो आपके लिए कितने महत्वपूर्ण है और एक अच्छे इन्‍सान है। प्रशंसा व उत्साह से उनकी सही भावनाओं का विकास होगा और गलत भावनाओं का विकास होगा और गलत भावनाओं के प्रति उनका रवैया स्वयं ही बदल जाएगा। अपनी एक्टिविटीज में उन्हें शामिल कीजिए ताकि वा आपको देखकर आपकी भावनाओं को समझकर जीवन के प्रति सही दृष्टिकोण अपना सकें।&lt;br /&gt;भावना से जुड़ी ही स्थिति ईक्यू के अंतर्गत आती है। एक जमाना था जब पैरेन्ट्स बच्चे का आईक्यू स्तर ऊंचा देखकर बेहद संतुष्ट व गर्व महसूस करते थे किंतु आज के माहौल में इमोषनल इंटेलिजेन्स का महत्व ज्यादा बढ़ गया है। दौड़भाग और प्रतियोगिता भरी जिन्दगी में र वक्त आपको अपने इमोशन्स को सही रूप में लेना पड़ता है। बल्कि जिंदगी का मुख्य हिस्सा है माइन्ड सेट। आप जैसा सोचते है उसी के अनुरूप परिस्थितियों से डील करते है। सच भी है कि मन के हारे हार है मन के जीते जीत।&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-9073593925857148646?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/9073593925857148646'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/9073593925857148646'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2010/06/blog-post.html' title='बच्चों में भावनात्मक मैच्योरिटी कैसे बढ़ाएं'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-831974181110277907</id><published>2009-10-21T10:55:00.000-07:00</published><updated>2009-10-21T11:04:18.797-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='नरेगा'/><title type='text'>नरेगा से नाराजगी क्यों ?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/St9M37wohOI/AAAAAAAAAnk/_lIqaXDVTlI/s1600-h/Narega1.jpg"&gt;&lt;img style="MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 199px; FLOAT: left; HEIGHT: 259px; CURSOR: hand" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5395115402431333602" border="0" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/St9M37wohOI/AAAAAAAAAnk/_lIqaXDVTlI/s400/Narega1.jpg" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;strong&gt; उत्तर&lt;/strong&gt; प्रदेश की बसपा सरकार का केन्द्र से छत्तीस का आंकड़ा क्या हुआ, राज्य के विकास कार्यो पर भी उसका असर दिखने लगा। सूबे के लाखों लोगों को आंशिक रोजगार देने वाली नरेगा योजना के प्रति शासन कितना गंभीर है। इस बात की बानगी है कि महज ३० फीसद ही रकम वह खर्च कर पाई २३ अरब रूपए की मद्द से महरूम रह गए यहां के मजदूर। इस योजना को यहां के नौकरशाहों ने बकरी बन के चर डाला। कई जिलों में नरेगा घोटाले का पर्याय बन के रह गई।&lt;br /&gt;&lt;div&gt;सीतापुर, हरदोई, रायबरेली, उन्नाव व बाराबंकी ये पांचों जिलों की सरहदें सूबे की राजधानी से जुड़ी हुई है। यहां पर नरेगा योजना में करोड़ों का घोटाला होता रहा और मण्डलायुक्त, डीएम, सीडीओ स्तर के जिम्मेदार अफसर हाथ पर हाथ धरे रहे। राज्य में कमोबेष हर जिले में यही हालात है। पूर्वांचल हो या पष्चिमी अंचल के जिले, बुंदेलखंड हो या रूहेलखण्ड, राज्य सरकार की लापरवाही का शिकार हो गई केन्द्र की महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरेगा)। इसका मुख्य कारण रहा मायावती का केन्द्र सरकार से टकराव।&lt;br /&gt;यूँ हजारों करोड़ की स्मारकों, प्रतिमाओं, उद्यानों एवं अन्य सुन्दरीकरण योजनाओं पर राज्य सरकार विकास में आए धन को पानी की तरह बहाती रही। हार कर हाई कोर्ट व मानसिकता के अधिकारियों को लताड़ सुनानी पड़ी। बजट का बड़ा हिस्सा बसपा के &lt;span style="font-size:+0;"&gt;कथित &lt;/span&gt;आदर्श एवं मुख्यमंत्री की प्रतिमाओं, बसपा के चुनाव चिन्ह हाथियों के निर्माण, स्मारकों पर लखनऊ एवं नोएडा में खर्च करने की चिंता मुख्य सचिव अतुल गुप्ता, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव कुं. फतेह बहादुर सिंह, पंसदीदा अफसर शंषाक शेखर, विजय शंकर पाण्डेय, महेष गुप्ता, सहित पुलिस आला अधिकारियों को रही। वहीं आम ग्रामीण, गरीबों, दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों के घरो में चूल्हा जलवाने वाली नरेगा योजना के प्रति राज्य सरकार की संवेदना व सक्रियता क्यों मद्विम पड़ गई।&lt;br /&gt;यही कारण है कि इस योजना में ग्राम प्रद्यानों, ग्राम विकास अधिकारियों व अन्य जिम्मेदार नौकरषाहों ने जमकर लुटाई की। चूंकि इस योजना को कांग्रेसनीत संप्रग सरकार ने शुरू किया था और अब इसका नाम महात्मा गांधी के नाम पर हो गया इसलिए बसपा सुप्रीमों का रूख इसके प्रति टेढ़ा-टेढ़ा सा है। नरेगा योजना की लोकप्रियता का फायदा पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने ही उठाया एवं बसपा नेत्री मायावती को आषातीत सफलता नहीं मिली इसलिए शायद वे नरेगा से खुन्नस रखे हुए है।&lt;br /&gt;यदि इस योजना में हुए घोटालों की सही ढंग से जांच हो जाए तो अनेक आला अफसर नप जाएंगे। क्योंकि इस योजना की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी डीडीओ, सीडीओ, और डीएम कमिष्नर की है। बहिन जी को खुश रखने व कृपा पात्र बने रहने के चक्कर में अफसरों ने इस योजना को हासिए पर रखा। जबकि इसका सबसे ज्यादा फायदा दलितों-गरीबों को ही मिलता। लेकिन राज्य सरकार के केन्द्र से छत्तीस के आंकड़े के चलते यह महत्वाकांक्षी योजना दम तोड़ रही है।&lt;br /&gt;इस योजना का हश्र इतना बुरा है कि कांगे्रस अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में उन्होंने स्वयं कई गड़बड़ियां पकड़ी। राहुल के संसदीय क्षेत्र अमेठी में भी नरेगा की हालत पतली है। चूंकि योजना का क्रियान्वयन सूबे की सरकार को करना है, इसलिए नरेगा का असली लाभ लाभार्थियों को नहीं मिल पा रहा है।&lt;br /&gt;सिर्फ सितम्बर माह में राय में नरेगा में करीब १३ सौ गड़बड़ियों की षिकायत मिली। यह संख्या बढ़ भी सकती। न केवल बसपा के ग्राम प्रधान बल्कि सपा, कांग्रेस व भाजपा मानसिकता के ग्राम प्रधानों ने इस योजना में डाका डाला। हालांकि सत्ता से जुड़े ग्राम प्रधानों को बचाने के लिए क्षेत्रीय विधायक ब्लाक प्रमुख, अफसरों ने कथित रूप से कोषिषे भी की। लेकिन कहीं-कहीं प्रबल जनविरोध एवं विपक्षी नेताओं की सक्रियता के पहले रिपोर्ट दर्ज की गई। मात्र सैतालिस एफआईआर दर्ज हो पाई। क्योंकि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस भी हाथ-पांव बचा कर काम कर रही है।&lt;br /&gt;नेता विपक्ष षिवपाल सिंह यादव का आरोप है कि जनता के धन को भ्रष्ट अधिकारी व प्रधान खा रहे है। इसमें सत्तारूढ़ दल के कतिपय नेताओं का भी हाथ है। मात्र ४५ अधिकारियों को दोषी पाया गया और ३० कर्मचारियों सहित ४५ लोगों पर कार्यवाही की गई। यदि इस मामले की सही जांच हो जाए तो हजारों ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे होते। शायद राज्य सरकार ग्राम प्रधानों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती।&lt;br /&gt;जब विपक्ष व मीडिया ने नरेगा में हो रहे घोटालों पर निषाना साधना शुरू कर दिया तो केन्द्र को चुप कराने की गरज से मुख्यमंत्री ५० फीसदी लोगों को रोजगार दिया जाना चाहिए। लेकिन सूबे की सरकार महज २० फीसद लोगों को ही रोजगार मुहैया करा पाई। पूर्वांचल व बुंदेलखण्ड में तो मात्र १७ प्रतिषत लोगों को नरेगा से जोड़ा जा सका। यानी ,एक तिहाई लोग ही इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठा पाए। योजना के तहत सिर्फ १५ दिन के भीतर ही मजदूरी का भुगतान का किया जाना चाहिए। लेकिन नौकरशाहों की वजह से तीन-तीन महीने मजदूरी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।&lt;br /&gt;राज्य शासन की इस नाकामी पर अब केन्द्र ने मॉनीटीिंग शुरू की है। इसके चलते मुख्यमंत्री ने नरेगा से संबंधित षिकायतों पर तुरंत निस्तारण किए जाने व पीड़ितों को शीघ्र व सुलभ लाभ दिलाने का आदेष दिया। मजदूरों की षिकायत पर रसीद दी जाएगी और उस पर उसका नम्बर अंकित होगा। पीड़ित फैक्स से भी षिकायत दर्ज करा सकेगा। लेकिन षिकायत दर्ज करने के लिए सहायक विकास अधिकारी एवं ग्राम पंचायत को अधिकृत किया गया है। जबकि षिकायत करने वालों की समस्या की जड़ ही ये लोग है। ऐसे में सूबेदार की यह योजना अव्यवहारिक है। मजदूर न तो ई-मेल करना जानता है और न ही सक्षम है। ऐसे में नरेगा की असफलता राज्य सरकार के माथे पर &lt;span style="font-size:+0;"&gt;बदनुमा &lt;/span&gt;दाग बन रही है। यदि शासन चाहता तो इस योजना का पूरा लाभ दलितों मजलूमों व बेकारी झेल रहे लोगों को मिल जाता। पर सियासत की चौसर में केन्द्र का पंगा अपने ही मोहरों को पीट रहा है। &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-831974181110277907?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/831974181110277907'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/831974181110277907'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='नरेगा से नाराजगी क्यों ?'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/St9M37wohOI/AAAAAAAAAnk/_lIqaXDVTlI/s72-c/Narega1.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-2978250461942667185</id><published>2009-07-08T01:46:00.000-07:00</published><updated>2009-07-08T02:09:48.583-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='खास बात'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कानपुर'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='केस्‍को'/><title type='text'>केस्को ने किया कानपुर का कबाड़ा</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SlRhTVvAP-I/AAAAAAAAAnE/1hbpT2MZddU/s1600-h/bpl_elecity1.gif"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5356012841730064354" style="FLOAT: right; MARGIN: 0px 0px 10px 10px; WIDTH: 240px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SlRhTVvAP-I/AAAAAAAAAnE/1hbpT2MZddU/s400/bpl_elecity1.gif" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; सूबे के सबसे बडे शहर कानपुर के करीब ५० लाख लोगों को बिजली आपूर्ति देने वाले संस्थान ÷केस्को' की कार्य प्रणाली अजब-गजब है। विभाग के सीएमडी हो या उर्जा मंत्री, सबके दावों के यूज उडाते हुए भीषण गर्मी में हो रही अंधाधुंध विद्युत कटौती से पूरा नगर बिलबिला उठा है। पर इसके मुखिया को जरा भी चिंता नहीं। त्रस्त लोगों का सब्र टूट रहा है, सड कों पर उतर कर विरोध कर रही भीड हिंसक बन कानून को खतरा पैदा कर रही है। औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्र को करोडों का नुकसान हो रहा है। आइये आपको इस नश्‍तर चुभाने वाले कटौती के करंट से रूबरू कराते हैं -&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;बेवफा बिजली के नखरे से कानपुर के लोग हलकान है। जून में जब गर्मी अपने पूरे शबाब पर थी तो यहां पर बिजली की कटौती भी पूरी दुश्‍मनी निभा रही थी। सूबे में सबसे ज्यादा कर अदा करने वाले इस शहर के लोगों का दुर्भाग्य है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें बिजली कटौती का दंश सहना पड़ता है। बसपा शासन में लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के पहले तक यहां पर संतोष जनक विद्युत आपूर्ति थी। करीब १६ घण्टे बिजली मिल रही थी। लेकिन बसपा प्रत्याशी की जमानत क्या जब्त हुई कि नगरवासियों पर एक तरह से केस्को व राज्य विद्युत परिषद जुल्म ढाने लगा। ठीक अपने पूर्ववर्ती सपा सरकार की तरह। उस पर तुर्रा यह है कि उर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय जब-जब शहर आये लम्बे-चौडे वायदे कर गए, उसके बाद विद्युत आपूर्ति की और भी ज्यादा दुर्दशा हो गई। हालांकि सूबे में बिजली संकट बढा है भीषण गर्मी के कारण मांग भी बेतहाशा बढ गई है। लेकिन बीते दो दशकों से कटौती में कानपुर को ही बलि का बकरा बनाया जाता रहा है। दूसरे शहरों को किस तरह निर्बाध बिजली दी जाती है, इसका उदाहरण हैं लखनऊ, नोएडा, हाथरस, बांदा, इलाहाबाद , इन शहरों में १८ से २० घण्टे बिजली दी जा रही है।&lt;br /&gt;कानपुर को बिजली देने वाले संस्थान केस्को में पहले एमडी स्तर का सीनियर आईएएस अधिकारी होता था। किन्तु बाद में यहां पर यह जिम्मेदारी टेक्नोक्रेट को दी जाने लगी। अब यह पद हटा कर यूपीपीसीएल के सीएमडी को यहां की जिम्मेदारी दी गई है। नगर में चीफ इंजीनियर रणधीर सिंह के नेतृत्व में सभी डिवीजनों के इंजीनियर व स्टेशन अधीक्षक विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था देख रहे है। यूपी में बीते १५ सालों में मात्र ४२० मेगावाट विद्युत उत्पादन की व्यवस्था की गई जबकि इतनी अवधि में करीब ५० फीसद मांग बढ़ गई। सूबे में १० हजार मेगावाट की मांग के सापेक्ष मात्र ६५००-७००० में वाट बिजली उपलब्ध है। केन्द्र सरकार का दावा तो गले ही नहीं उतरता। एक पावर हाउस बनने में कम से कम डेढ दो साल लगता है पर केन्द्रीय विद्युत मंत्री सुशील कुमार शिंदे १०० दिनों में ५६५० मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन का दावा कर रहे हैं। वहीं रामवीर उपाध्याय तीन सालों में राज्य में सरकारी क्षेत्र में २००० व निजी क्षेत्र में २१३० मेगावाट के नए विद्युत उत्पादन केन्द्र शुरू करने का दावा कर रहे है।&lt;br /&gt;कानपुर नगर को उत्तरी ग्रिड से बिजली मिलती है। यहां पर २८४ मेगावाट क्षमता का पनकी में पावर हाउस है जिसमें आजकल करीब २०० मेगावाट बिजली बन रही है। यहां सालों से २५० मेगावाट की नई यूनिट गैस आधारित लगाने पर गेल (गैस इण्डिया लि०) की सहमति न मिलने से काम शुरू नहीं हो पाया। पहले रिवर साइड पावर हाउस (अब कबाड़ हो चुका है ) से ८२ मेगावाट बिजली शहर को मिलती थी। तब बिजली की किल्लत नहीं थी। कानपुर के औद्योगिक महत्व को देखते हुए १९४७ से लेकर १९८९ तक यह कटौती मुक्त शहर था। पर सियासी प्रतिनिधित्व के कमजोरी के कारण यहां का रूतबा लखनऊ व इलाहाबाद को मिल गया। रही सही कसर केस्को व टोरंट के बीच विद्युत वितरण का नाटक पूरी कर रहा है। केस्को को प्रतिवर्ष कोई ९० करोड का नुकसान हो रहा है। इसमें से आधा लाइन लॉस के कारण बाकी केस्को कर्मियों की लापरवाही के कारण होता है।&lt;br /&gt;केस्को की अंधाधुंध कटौती के कारण पूरे शहर की जलापूर्ति बाधित हो गई है। लोग एक-एक बूंद पानी का तरसते रहे। हाल यह हुआ कि पानी को लेकर खून बह गया। दो लोगों की हत्या तक बिजली सकंट के कारण हो गयी। प्यासे लोगों ने जल संस्थान को घेरा तो जीएम रतन लाल ने सारा दोष केस्को पर मढ़ दिया। दूसरी तरफ कटौती के खिलाफ उद्योगपतियों ने राजस्व न देने का एलान कर दिया। औद्योगिक फीडर से कटौती के कारण रोजाना ३० करोड से ज्यादा की उत्पादन क्षति होने से उद्योगपतियों व व्यापारियों में रोष है। कोपे इण्डस्ट्रीयल इस्टेट के चेयर मैन मलिक विजय कपूर व आईआईए के मनोज बंका व उद्यमी बलराम नरूला ने केस्को को कोसते हुए बताया कि यदि यही हालात रहे तो वे लोग यहां से उद्योग उत्तरांचल या एमपी ले जाएंगे। लाखों लोगों की रोजी रोटी के दुद्गमन बने केस्को की कार्य प्रणाली व भ्रष्ट अफसरों के चलते राज्य के सबसे बडे नगर कानपुर के ५० लाख लोगों का चैन तो छिन गया साथ ही छात्रों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, मजदूरों, प्राइवेट सेवा के लोगों की जिन्दगी में भी अंधेरा कायम है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-2978250461942667185?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2978250461942667185'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/2978250461942667185'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/07/blog-post.html' title='केस्को ने किया कानपुर का कबाड़ा'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SlRhTVvAP-I/AAAAAAAAAnE/1hbpT2MZddU/s72-c/bpl_elecity1.gif' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-1855114505847192572</id><published>2009-04-23T10:16:00.000-07:00</published><updated>2009-04-23T10:33:18.821-07:00</updated><title type='text'>भारत का महाशक्ती बनना तय है - सतपाल महाराज</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SfCmLSgyHFI/AAAAAAAAAmc/whGUsLrMP5k/s1600-h/maharaji_new+photo.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 280px; height: 400px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SfCmLSgyHFI/AAAAAAAAAmc/whGUsLrMP5k/s400/maharaji_new+photo.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5327941072057408594" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;वो उत्तराखंड की राजनीति में अपना वर्चस्व रखते हैं और राज्य को नयी दिशा देने का श्रेय भी उन्हें जाता है। वो उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के मुख्य संरक्षक के रूप में नयी विचार धारा को आगे बढ़ाने वाले हैं। इतना ही नहीं 1994 में उन्होंने  रामपुर तिराहा में हुये जघन्य अत्याचार को देख कर 350 किमी की शहीद श्रदांजलि पद यात्रा की और राजनीति में पर्दापण किया। इन्होंने रेल मंत्रालय और वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में राज्यमंत्री के पद पर अपनी सेवायें दीं , ये हैं भारत को विश्व में महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का सपना देखने वाले &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सतपाल जी महाराज &lt;/span&gt;।  &lt;span&gt;&lt;br /&gt;इन्हें&lt;/span&gt; कांग्रेस ने उत्तराखंड की पौढ़ी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। उनसे बात की हमारे संवाददाता सतीश  आर्या ने। प्रस्तुत है। बात चीत के कुछ खास अंश ......&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;कांग्रेस ने आपको पौड़ी लोकसभा सीट से &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;प्रत्याशी&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; बनाया है कैसा लग रहा है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;अच्छा लग रहा है। एक बार फिर क्षेत्र की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;बतौर पालीटीशियन  आपके द्वारा पौड़ी की जनता के लिए अब तक किए जाने वाले कार्य।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;पौड़ी क्षेत्र की जनता के लिए हमने अनेकों कार्य करवाए है। बहुत सी योजनाएं लागू कराई जिनमें शहीदों के आश्रितों को नौकरियां, वृद्धावस्था पेंषन, मेडिकल सुविधाए, यातायात की सुविधाएं आदि शामिल हंै। शहीदों की स्मृति में नारसन में एक शहीद स्मारक का निर्माण भी कराया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आपने&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; राजनीतिक जीवन की शुरूआत किस तरह से की। आप पहली बार कब सांसद चुने गये।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;मैने उत्तराखंड राज्य बनाने के लिए आंदोलन कारियों की सर्वोच्च संस्था उत्तरांचल संयुक्त संघर्ष समिति में श्री इंद्रमणि बकाड़ी के साथ मैने मुख्य संरक्षक के नाते सड़कों पर लड़ाई लड़ी। मै 1996 में पहली बार सांसद चुना गया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;एक&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; राजनेता के रूप में आपका सबसे बड़ा सपना, जो आप सच करना चाहते हो।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;अपने देश भारत को विश्व भर में महाशक्ति राष्ट्र के रूप में देखने का। जहां पर हर धर्म और जाति के लोग कंधे से कंधा मिलाकर चलें।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उत्तराखंड&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; को राज्य का दर्जा कब प्राप्त हुआ। इसमें आपकी भूमिका कैसी रही।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;उत्तराखंड को राज्य का दर्जा 1997 में मिला। 1996 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच.डी.देवगौड़ा से षिफारिष की और पुनः 1997 में इंद्रकुमार गुजराल जी से षिफारिष की। जिन्होंने लालकिले की प्राचीर से उत्तराखंड राज्य की घोषणा की।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;किस प्रधान मंत्री के कार्यकाल में उत्तराखंड को राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;प्रधानमंत्री इन्द्रकुमार गुजराल जी के कार्य काल में।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;उत्तरांचल को उत्तराखंड में बदलने का कोई विषेष कारण नाम बदलने का एलान किस राजनेता ने किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;कोई विशेष कारण नही रहा। यह देश के उत्तर भाग में होने की वजह से उत्‍तराखण्‍ड  रखवाया गया। इसकी घोषणा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;प्रथक राज्य बनाने को लेकर 1994 में हुए रामपुर तिराहा संघर्ष से आपके जीवन में कैसा प्रभाव पड़ा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;उत्तराखंड को प्रथक राज्य का दर्जा दिलाने के लिए बहुत संघर्ष पड़ा। हमने लाखों लोगों में जागृति पैदा की। इन आन्दोलनकारियों पर रामपुर तिराहा मुजफ्फरपुर में हुए जघन्य अत्याचार से मेरा दिल दहल उठा। हमने आन्दोलन को तेज किया। वहां शहीद हुए अनेको निरीह आन्दोलनकारियों के परिवारों की आजीविका का प्रबन्ध किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आपकी शहीद श्रंदाजलि पद यात्रा कैसी रही। कितने किलोमीटर का सफर रहा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;सन् 1995 में गोपेष्वर से रामपुर तिराहा तक शहीद श्रद्धान्‍जली  पद यात्रा की जो अच्छी रही। इससे प्रदेश सरकार की भी नीदें उड़ गयी। यह 350 किमी का सफर था।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;केन्द्र में रेल मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद अपने क्षेत्र की जनता के लिए क्या किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;रेल मंत्रालय का कार्यभार सभालने के  बाद मैने कई शहीदों के आश्रितों को नौकरीयाँ दिलवायी। इसके साथ ही रेलवे आउटसोर्सिंग एजेन्सियों की स्थापना तथा कम्प्यूटरीकृत रेल आरक्षण का विस्तार रेलवे के लिए विभिन्न समितियों व जोनल रेलवे परामर्शदात्री समिति का निर्माण कराया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;वित्तमंत्री के रूप में आपने कौन सी सुविधाएं प्रदेश की जनता को दी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;वित्तमंत्री के रूप में मैने &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;अपने&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt; क्षेत्र की माता बहनों के लिये बीमा योजना लागू करवायी, यह पूर्ण पहाड़ी महिलाओं के लिए थी। पूर्व सैनिकों का वेतन बढ़ाने का कार्य किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;ऋषिकेष स्थापित दवाखाना (आईडीपीएल)की दषा दयनीय थी। क्या किया उसके लिए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;ऋषिकेष स्थापित दवाखाना (आईडीपीएल) जो कई वर्षो से मरणासन्न पड़ा हुआ था उसके पुर्न संचालन के लिए हमने वित्त मंत्रालय से 9 करोड़ 80 लाख रूपये स्वीकृत करवाया। इससे लोगों को अपनी योग्यता और कौषल दिखाने का अवसर प्राप्त हुआ।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आपके द्वारा उत्तराखंड को औद्यौगिक पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने का कोई विशेष कारण।  &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;यह क्षेत्र औद्यौगिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ा होने के साथ-साथ औद्यौगिक रोजगार न होने के कारण मैने उत्तराखंड को औद्यौगिक पिछड़ा क्षेत्र घोषित किया।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आपकी पत्नी अमृता रावत भी बीरोंखाल विधान सभा सीट से विधायक हैं, उन्होंने जनता के लिए क्या किया। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;उन्होंने भी क्षेत्र की जनता के लिये अनेकों सुख सुविधाएं दी है। एनडी तिवारी की सरकार में अमृता ऊर्जा बाल विकास राज्य मंत्री रहीं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;राज्य &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;के&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt; प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के कार्यकाल में आपका योगदान। उनके कार्यकाल के बारे में क्या कहेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;एनडी तिवारी  जी के कार्य काल में बीस सूची कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का उपाध्यक्ष रहा। इस दौरान अखिल भारतीय स्तर पर राज्य को प्रथम स्थान मिला। जिससे केन्द्र सरकार के द्वारा विकास के लिए एक हजार करोड़ रूपये से बढ़कर चार हजार करोड़ रूपये मिले। तिवारी जी का कार्यकाल बहुत ही अच्छा रहा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;सत्ताधारी भाजपा सरकार अपनी जीत पक्की करने का दावा कर रही है। क्या कहेंगे ।    &lt;/span&gt;                     &lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;विरोधी लोग तो अपनी-अपनी गाते हैं । यह तो चुनाव बाद ही पता चलेगा। कि कौन कहां पर है। सत्ताधारी सरकार लाखों रूपये खर्च कर रही है, जनता हिसाब लेगी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;क्या कांग्रेस की घोषणा पत्र मतदाताओं को रिझा पायेगा। खासकर गरीब जनता के लिए क्या योजनाएं है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;शिक्षा&lt;/span&gt; &lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;के क्षेत्र में मेरी रणनीति तेजी से कार्य करेगी। क्षेत्र को आधुनिक सुविधाओं से नवाजा जायेगा। गढ़वाल विष्वविघालय में कार्यरत अंषकालिक शिक्षकों के समायोजन एवं विनियमितिकरण की समस्याओं का समाधान किया जायेगा। इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;महिला आरक्षण के बारे में क्या कहेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;महिला आरक्षण जरुर लागू किया जायेगा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;चुनाव से पूर्व नेता कोरे वायदे करते है बाद में जनता को भगवान के भरोसे को छोड़ देते है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;सभी नेता ऐसे नही होते हैं, यदि मैं ऐसा होता तो क्षेत्र की जनता से उतना प्यार नहीं मिलता जितना मुझे मिल रहा है। हम करने में विश्वास रखते है, कोरे वादे पर नहीं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;राहुल गांधी के बारे में आप क्या कहेंगे। क्या कांग्रेस नेतृत्व उन्हें प्रधानमंत्री बनायेगा या किसी और को।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;राहुल गांधी का भविष्य उज्ज्वल है और एक दिन वे राष्ट्र का मार्गदर्शन जरूर करेगें। फिलहाल कांग्रेस आला कमान क्या करता है यह समय बतायेगा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;आप युवा वर्ग से क्या अपील करना चाहेंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;मै युवा वर्ग से अपील करता हूं कि वे अपने मताधिकार का प्रयोग इस क्षेत्र, प्रदेष और देष के हित में अवष्य करें। मजबूत व स्थाई सरकार बनाने को कांग्रेस को वोट दें। जब केन्द्र में मजबूत सरकार बनेगी तो विकास और रोजगार के अनेकों अवसर खुलेंगे।&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-1855114505847192572?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1855114505847192572'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1855114505847192572'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/04/blog-post_23.html' title='भारत का महाशक्ती बनना तय है - सतपाल महाराज'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SfCmLSgyHFI/AAAAAAAAAmc/whGUsLrMP5k/s72-c/maharaji_new+photo.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-5227149870433760461</id><published>2009-04-18T12:20:00.000-07:00</published><updated>2009-04-20T10:03:30.110-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कानपुर'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='मयंक गर्ग'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='( Mayank Garg ) सी0ए0'/><title type='text'>सी.ए. पर अवैध वसूली का आरोप</title><content type='html'>कभी सोचा न था कि मंदी का दौर इतना भारी पडेगा कि प्रतिष्ठित समझा जाने वाला सी.ए. फार्म के सत्यापन के बदले में पाँच-पाँच सौ रूपये वसूल कर खर्चा चलायेगा  पर यह घटना सत्य है। कानपुर के एक चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट ने यह कारनामा किया है। उसने अपने अण्डर में काम करने वाले सी.ए. छात्रों के परीक्षा फार्म पर हस्ताक्षर करने के बदले में पाँच सौ रूपये वसूलना शुरु कर दिया। छात्रों ने इस घटना की लिखित शिकायत  भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्‍थान (आईसीएआई) कानपुर में देकर संबन्धित सी.ए. के खिलाफ कार्यवाई करने की गुजारिष की है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  प्राप्त जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट मंयक गर्ग ने सी.ए.में अध्यनरत छात्र राकेष कुमार शर्मा के एक परीक्षा फार्म पर हस्ताक्षर किए थे। छात्र राकेष मंयक के अण्डर में पेड स्टाफ के रूप में कार्य करता था। और वह सी.ए. पी.ई.-2 का छात्र है। राकेष ने मंयक से अपने परीक्षा फार्म पर सत्यापन के लिए हस्ताक्षर कराये थे। क्योंकि परीक्षा फार्म पर किसी सी.ए. के हस्ताक्षर होने जरूरी होते है। जिसके बदले में मंयक ने राकेष से 500 रूपये बतौर सत्यापन फीस वसूल कर लिए जो कि अवैधानिक है और व्यवसायिक कदाचार की श्रेणी में आता है। काम करा कर भुगतान न देने के आरोप भी कई अन्य छात्रों ने गर्ग पर लगाये हैं । शनिवार को छात्रों ने गर्ग के आफिस के बाहर हंगामा व नारेबाजी की ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;मंयक गर्ग वर्तमान समय में बिराहाना रोड स्थिति ‘नवल किशोर एण्ड कम्पनी’ चार्टर्ड एकाउन्टेन्ट फार्म में साझेदार है। जिसकी सदस्यता संख्या 77837 है। राकेष शर्मा ने इसकी लिखित शिकायत  कानपुर स्थित भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान में की है। जब हमने उक्त सी.ए. से बात की तो उसने रूपये वसूलने के आरोप से इनकार कर दिया और कहा कि मैं किसी राकेष शर्मा को नहीं जानता, उक्त बातों का सबूत दिखाये जाने पर वो इस संवाददाता से बदसलूकी और गालीगलौज करने लगा। इतना ही नहीं उसके खैरख्वाह और लोकल चैनल सूर्या टीवी के मालिक राहुल जैन ने भी इस संवाददाता को फोन पर धमकी दी और खबर दबाने का फरमान दे डाला।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;छात्र राकेष शर्मा ने हमें बताया कि उसने 14 फरवरी 09 से 20 मार्च 09 तक उक्त मयंक गर्ग के अण्डर में काम किया है। राकेष का यह भी कहना है कि इस बीच वे 4 मार्च से 8 मार्च 09 तक मुझे आफिस के काम से भोपाल भी ले गये। यदि वे मुझे पहचानने से इनकार करते है तो उनके यहां काम के दौरान हस्ताक्षर कैसे हुये। मेरे परीक्षा फार्म पर उनके हस्ताक्षर इसका सबूत है।&lt;br /&gt;  अब सी.ए. मंयक गर्ग के खिलाफ (आईसीएआई) कितनी सख्त कार्यवाही करती है यह तो समय बतायेगा पर इतना तो तय है कि गर्ग द्वारा व्यवसायिक कदाचार किया गया है जो उन्हें कतई शोभा नहीं देता।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-5227149870433760461?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/5227149870433760461'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/5227149870433760461'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/04/blog-post_18.html' title='सी.ए. पर अवैध वसूली का आरोप'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-4253575636132454110</id><published>2009-04-16T06:04:00.000-07:00</published><updated>2009-04-16T06:05:27.591-07:00</updated><title type='text'>मानवाधिकार हनन में अव्वल है उत्तर प्रदेश</title><content type='html'>जिस कानून व्यवस्था की बहाली के लिए उत्तर प्रदेश की जनता ने मई 2007 में मायावतीसरकार को पूर्ण बहुमत दिया था, वह अब तार-तार हो गई हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग रिपोर्टमें खुलासा किया गया है कि पिछले साल अकेले उत्तर प्रदेश से उसके पास मानवाधिकारों के उल्लंघनकी 55,216 शिकायतें आई जो अपने आप में रिकार्ड हैं। आयोग के पास इस साल कुल 94,559शिकायतें आई थी, जिनमें 58 फीसदी से ज्यादा अकेले उत्तर प्रदेश से आई थी। बाकी 42 फीसदीमामले देश के बाकी राज्यों से आए।राष्ट्रीय महिला आयोग की ताजा रिपोर्ट भी उत्तर प्रदेश की भयावह तस्वीर पेश करती है।इस साल आयोग के पास अकेले उत्तर प्रदेश से बलात्कार, दहेज उत्पीड़न व यौन शोषण आदि के2,381 मामले दर्ज कराए गए। आयोग में इस साल कुल 4712 मामले आए जिनमें आधे से ज्यादाउत्तर प्रदेश से दर्ज हुए महिला उत्पीड़न के मामले में दिल्ली दूसरे स्थान पर नजर आया जहां से724 शिकायतें दर्ज कराई गई। लेकिन उत्तर प्रदेश व दिल्ली से जुड़े मामलों की संख्या में भारी अंतररहा। महिला आयोग ने माना कि महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़े मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआहै। आयोग के पास 2006 में 2155 व 2007 में 4218 मामले पहुंचे।कम से कम एक महिला मुख्यमंत्री को यह उपलब्धि तो अवश्य ही हासिल करना चाहिए कि उसकेकार्यकाल में महिलाएं सुकून से जी सके। उन्हें हर संभव भयमुक्त वातावरण मिले ताकि वह अपनेव्यक्तित्व को निखार सके। लेकिन माया राज में स्थिति एकदम उल्टी हैं। मायावती के भयमुक्त समाजमें मानवाधिकार उल्लंघन के सारे रिकार्ड टूट गये हैं। अब देखना ये है कि आगामी लोकसभा चुनावोंमें बसपा को जनता क्या जवाब देती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-4253575636132454110?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4253575636132454110'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4253575636132454110'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/04/blog-post.html' title='मानवाधिकार हनन में अव्वल है उत्तर प्रदेश'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-7966905481977625936</id><published>2009-02-25T05:06:00.000-08:00</published><updated>2009-02-25T05:20:53.768-08:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='टेनरियों के अवशेष'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='प्रदूषण'/><title type='text'>निरंकुश  होता प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड</title><content type='html'>कानपुर के टेनरियों के अवशेष  गंगा में बहाने का मामला हो या ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण करने का प्रकरण, सबमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मिली भगत साफ जाहिर होती है। इस बोर्ड के लिये  संसदीय समिति के आदेशों  का भी कोई मतलब नहीं रह गया है। इसे अंगूठा दिखाकर औद्योगिक घरानों को फायदा  पंहुचने   के कामकाज को अंजाम देना बोर्ड का चलन हो गया है। 1995 से लगातार यह बोर्ड संसदीय समिति के आदेशों  की धता बताते आ रहा है। मामला सीतापुर जिले के सक्सेरिया चीनी मिल के प्रदूषण से जुड़ा हैं । 1995 में दस सांसदों  की समिति ने शिकायत मिलने  पर इस चीनी मिल द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण का मौका-मुयाना किया था। 25 अगस्त 1995 को समिति ने अपनी रिपोर्ट में निर्देष दिया था कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चीनी मिल द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण को न केवल खत्म करे। बल्कि नगर पालिका और रिहाएशी  इलाकों के अंदर उद्योग लगाने की अनुमति न दी जाए। कमेटी की इस रिपोर्ट    पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आला हुक्मरान एस0सी0 भट्ट के भी हस्ताक्षर हैं। भट्ट संसदीय समिति के साथ भी गये थे। जिसमें पाया था कि मिल से सटे खेतों की फसल नष्ट हो रही है। ध्वनि प्रदूषण ज्यादा हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात यह हैं कि प्रदूषण फैलाने वाली इस कम्पनी को निर्देष देने की जगह प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एक डिस्टलरी की भी उसी स्थान पर संस्तुति कर दी जनसूचना अधिकार के तहत बोर्ड से जब जानकारी मांगी गयी तो ये बात सामने आयी  । तकरीबन दो साल बाद 3 अगस्त 2005 को मुख्य पर्यावरण अधिकारी के.के. शर्मा ने सूचना आयोग की सख्ती  के बाद सिर्फ यह माना कि फैक्ट्री नगरपालिका सीमा बिसवां के अंदर हैं। हालंकि उन्होंने संसदीय समिति की जांच से अनभिज्ञता  जताई। गौरतलब है कि शराब की फैक्ट्री का लाइसेंस देने के लिए सुनवाई जरूरी होती है। दिलचस्प यह है कि जनसुनवाई जिला मुख्यालय सीतापुर में की गई। जो 35 किमी दूर है। वह भी तब जब भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मुत्रालय के निर्देष और कानून के मुताबिक जनसुनवाई उस स्थान पर होनी थी। जहां फैक्ट्री लगाई जानी थी।  बाद में बोर्ड ने भी सूचना आयोग में माना कि जनसुनवाई प्रोजेक्ट साइट पर होनी चाहिए  थी। मौके पर सुनवाई का भारत सरकार का 14 सितम्बर 2006 का निर्देष राज्य सरकार को  19 अक्टूबर 2006 तक नहीं प्राप्त हुआ था। लेकिन यह बात सिर्फ बोर्ड के अफसर कहते हैं। इससे केन्द्र और राज्य के बीच की संवादहीनता समझी जा सकती है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-7966905481977625936?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7966905481977625936'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/7966905481977625936'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2009/02/blog-post.html' title='निरंकुश  होता प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-8369710947666889972</id><published>2008-08-07T11:21:00.000-07:00</published><updated>2008-08-07T11:52:20.648-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Khulasa'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Kanpur'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='डेली Passenger'/><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='Train'/><title type='text'>ठहरी हुई जिन्दगी का दूसरा नाम है  - डेली पैसेन्जर</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJtDrLNcBeI/AAAAAAAAAYY/WF477C8epHE/s1600-h/57528386_cbd5ced147_m.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer; width: 281px; height: 212px;" src="http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJtDrLNcBeI/AAAAAAAAAYY/WF477C8epHE/s320/57528386_cbd5ced147_m.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5231849801143551458" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt;गाड़ी बुला रही है ... &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt;चलना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt; ही जिन्दगी है,&lt;br /&gt;चलती ही जा रही है। &lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;  भले ही कानों से टकरा कर यह गीत दिमाग की सांकल खोलने लगे लेकिन हकीकत यही है कि गाड़ी भले ही तेजी से चलती हो किन्तु इस पर सवार डेली पैसेन्जर की जिन्दगी के पांव पर बेडिय़ां पड़ जाती हैं। वही सुबह ४-५ बजे उठना,चपटपट स्नान करना थोड़ा सा पूजा ध्यान। जल्दी-जल्दी पेट में निवाले भरना व जीभ व हसरतों को जलाती गर्म चाय की चुस्कियां। लंच बाक्स की लपक कर तेजी से स्टेशन की ओर बढ़ते कदम। ट्रेन या अन्य वाहन में बैठकर आफिस की गणित में जूझता दिमाग। माथे पर चिंताओं की उठती गिरती लहरों का मंजर। बुदबुदाते ओठों पर मसाले की तैरती पीक या फ्रेश होकर टेंशन फ्री की आड़ में अधरों पर सुलगती सिगरेट। गंतव्य स्थल की ओर फिर भागते पांव। जल्दी से हाजिरी लगाने की चाहत। फाइलों में खपाते सिर। या कारखानों में मशीनों से जूझती उंगलियां। फिर लंच और मिल बांटकर खाने का आनंद। हल्का फुल्का मजाक, तफरीह, नोंक-झोंक और फिर काम। घड़ी की सुइयों की ओर लगी टकटकी फिर घर वापसी का वही पुराना अंदाज।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सब एक घिसी पिटी कहानी या थीम का अंग। रोजाना इसी जद्दोजहद मे कम होते जिन्दगी के  दिन। बीबी-बच्चों से कटी यार दोस्तों से छूटी जिन्दगी का ही दूसरा नाम है डेली पैसेन्जर।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;करीब चालीस हजार लोग इस शहर से नियमित डेली पैसेन्जर है हजारों लोगों की सर्विस खत्म होने को आ गई। जिन्दगी के तमाम पड़ाव डाले। रेल के डिब्बों, बसों, &lt;span&gt;ट्रकों &lt;/span&gt; में देख डाले। गाड़ी के पहियों के साथ ही उम्र की रफ्तार बढ़ती चली गयी ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आचार्य नगर के सुरेश बीते २८ सालों से लखनऊ अप डाउन कर रहे हैं। चूंकि रेलवे में है अत: सहूलियतें भी मिली हैं लेकिन परिवार वाले, रिश्तेदार व इष्ट मित्रों की शिकायत रहती है कि कभी आते नहीं। सुरेश के बच्चे भी पापा की नामौजूदगी से दुखी हैं। अशोक शुक्ला बर्रा से रोजाना रायबरेली जाते हैं। ट्रेन में चलते-चलते रिटायरमेंट के करीब आ गए हैं। आईटीआई  में स्पोर्ट कोटे से भर्ती अशोक अब बिटिया की शादी के लिए परेशान हैं, क्योंकि नौकरी के दौरान उनका रिश्तेदारों से संपर्क कटा रहा। श्रीमती विन्ध्यवासिनी त्रिपाठी रिटायर्ड टीचर है। पूरी जिन्दगी जिले के अकबरपुर इलाके  के प्राइमरी स्कूल में पढ़ाते, बस व ट्रक यात्रा में गुजार दी। यही कारण है कि अब घर में बैठकर अच्छा नहीं लगता, तो सामाजिक कार्यो में हिस्सा लेने लगी। फर्रुखाबाद का अली हसन रोजाना सुबह वाली ट्रेन से कानपुर आता है वह एक फैक्ट्री में कार्यरत है लेट होने पर आधे दिन का वेतन कट जाता है। सही समय में पहुंचना एक बड़ा टेन्शन है। बारा अकबरपुर से वकील रईस कचहरी रोडवेज बस से आते हैं। सड़क के किनारे पेड़ फैक्ट्री व खेत खलिहान आंखों व दिमाग में बस गया है। ऐसा ही फतेहपुर से कचहरी आने वाले वकील अनिरुद्घ के साथ है कभी ट्रेन तो कभी ट्रक  ही उनको मंजिल तक पहुंचाता है। चूंकि इनकी वकालत यहां पर जम चुकी है और इनके  जिले के  लोग अपना मुकदमा उन्हे ही देते हैं। उनका मानना है कि यह भी एक सजा सरीखी है सुबह चलते हैं तो बच्चे सोते हैं और देर रात पहुंचने पर भी बेचारे इंतजार करके सो जाते हैं। पत्नी खाने का इंतजार करते-करते ऊंघ जाती है। इतवार को हफ्ते भर की खुमारी उतारते हैं। महेन्द्र व अशोक दो ऐसे डेली पैसेन्जर है जिन्होने नौकरी के सफर को ट्रेन से पूरा करते समय पूनम व सुधा को जिन्दगी का हमसफर बना डाला। महेन्द्र व पूनम सुबह एक साथ ही लखनऊ आते जाते रहे। वे कब और कैसे इतने करीब आ गए पता ही नहीं चला। हालांकि दोनों ने अन्तर्जातीय विवाह किया, लेकिन अब घर गृहस्थी मजे से चल रही है। वहीं सुधा एक बार आफिस में देर होने के कारण देर रात वाली ट्रेन से चली रास्ते में उससे कुछ लफंगों ने बदतमीजी की। फिल्मी हीरो की तरह अशोक  उसे बचाने में पिटे। अचानक ही सुधा के  घर वालों को अशोक जंच गया और अब यह दम्पत्ति रोज एक साथ आते जाते हैं। सेन्ट्रल व अनवरगंज के अलावा गोविन्दपुरी, पनकी व रावतपुर से हजारों लोग नौकरी के लिए लखनऊ, फतेहपुर, इलाहाबाद, फर्र्रुखाबाद, उरई, इटावा, बालामऊ, बाराबंकी, रायबरेली, हमीरपुर सहित दर्जनों छोटे स्टेशनों के लिए जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इनका एक तगड़ा संगठन होता है इनसे पंगा होने का मतलब आ बैल मुझे मार। करीब दो दर्जन गाडिय़ों पर इनका दबदबा रहता है। अक्सर ही डेली पैसेन्जर व आम यात्रियों के बीच विवाद एवं मारपीट की घटनाएं होती है। कई मर्तबा तो यात्रियों को चलती ट्रेन से फेंकने की नौबत आ जाती है। डेली पैसेन्जर दबाव बनाकर सीट पर जबरन बैठते हैं। आरक्षित सीट पर भी कब्जा कर लेते हैं। यही नहीं ट्रेन में जुआ खेलना, गंदगी फैलाना, अश्‍लील बातचीत करना, महिला यात्री पर फब्तियां व छेड़छाड़, बुजुर्गों से दुव्र्यवहार करना अब इस संगठन की फितरत बन चुकी है। ट्रेन का सामान तोडऩा, स्टेशन के अलावा अन्य स्थानों पर चेन पुलिंग करना, बिना टिकट यात्रा  करना, एम।एस.टी. समय से न बनवाना डेली पैसेन्जर की पहचान बन चुकी है कई बार मजिस्ट्रेट चेकिंग में इन्हें पकड़ा जाता है, लेकिन दबाव बना कर सारे डेली पैसेन्जर उसे छुड़ा लेते हैं। जी.आर.पी. वाले भी इनसे दूर ही रहते हैं। दरअसल यह रेल यात्री अपनी नीरस एवं तनाव भरी ड्यूटी के चलते कुंठित हो जाते हैं। आफिस या प्रतिष्ठान में उनके  बास से छोटी-मोटी तकरार का प्रभाव दिखता है। इससे उनमें हिंसक प्रवृत्तियां उत्पन्न हो जाती है। समाजशास्त्री डा. बी.एन. सिंह बताते है कि घर वालों से दूर रहने एवं काम की थकान उनकी संवेदनशीलता कम करती है। सारे डेली पैसेन्जरों की एक सी प्रवृत्ति उन्हें दुव्यर्वहार के लिए प्रेरित करती है। पर सब ऐसे नही हैं ।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;जो भी हो, ये भी एक  जिंदगी है और फिर ..........&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt;चलना&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt; ही जिन्दगी है, चलती ही जा रही है ....&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 102, 102);"&gt;गाड़ी बुला रही है ... &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-8369710947666889972?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8369710947666889972'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8369710947666889972'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/08/blog-post_6002.html' title='ठहरी हुई जिन्दगी का दूसरा नाम है  - डेली पैसेन्जर'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJtDrLNcBeI/AAAAAAAAAYY/WF477C8epHE/s72-c/57528386_cbd5ced147_m.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-1702822431621341832</id><published>2008-08-07T10:36:00.000-07:00</published><updated>2008-08-07T10:54:10.378-07:00</updated><title type='text'>किन्नरों से न उलझना , वरना होगा पड़ेगा शर्मसार</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJs2naeSFPI/AAAAAAAAAYQ/mccn7qhkwVI/s1600-h/kinnar.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer; width: 300px; height: 192px;" src="http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJs2naeSFPI/AAAAAAAAAYQ/mccn7qhkwVI/s320/kinnar.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5231835442870097138" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="color: rgb(255, 0, 0); font-weight: bold;"&gt;चलो उठो, राजा आज फंसे हो&lt;/span&gt;। हमारा नेग चुपचाप निकाल दो। हाय-हाय यही हमार धंधा है। जल्दी निकालो आगे भी वसूलना है। बड़े कंजूस लगते हो, अभी कायदे से मांग रहे हैं  वरना .......  ये जुमले अब ट्रेनों व बसों में आम हो चले हैं।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कभी समाज का अंग माना जाने वाला किन्नर समुदाय शादी-ब्याह या किसी के अंगने में फूल बिखेरने पर बधाइयां देने का काम करते था  और इसके बदले में उन्हें जो कुछ दे दिया जाता था, वे संतुष्ट हो जाते थे। समय के बदलाव के साथ-साथ किन्नरों की जहनियत काफी परिवर्तित हो चुकी है। वर्तमान समय में स्थिति यह है कि किन्नर पूरे दल-बल के साथ किसी के दरवाजे पर आ धमकते हैं, और वे खुद तय करते हैं कि उन्हें कितना पैसा चाहिए। हालांकि पैसे  में कुल मोल-भाव हो जाता है लेकिन इसके लिए आपको घंटों उनसे सामने गिड़गिड़ाना पड़ेगा। किन्नरों से ऊंची आवाज में बात करके आप स्वयं को परेशानी में डाल सकते हैं। इसलिए उनसे विनती करने में ही भलाई है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;ये  बात रही घरों की , आप बाहर भी किन्नरों की नजरों नहीं बच सकते, खास कर सफर के दौरान। किन्नरों की व्यापकता सबसे ज्यादा रेलगाडिय़ों में देखने को मिलती है। शायद ही कोई रूट किन्नरों से बचा हो। दिल्ली से हावड़ा जैसे तमाम लम्बे रूट की गाडिय़ों में किन्नर जबर्दस्ती प्रत्येक व्यक्ति से १०-२० रू0 तक वसूलते हैं। अब जरा सोचिए कि अगर एक बोगी में ७२ सीटें के अनुसार लोगों से १०-१० रू0 भी लिए तो साहब पूरी १८-२० बोगियों का हिसाब लगाकर देखिए। एक ट्रेन से लगभग १३ हजार रू0 के आस-पास बनता है। नीलांचल ट्रेन में सफर के दौरान किन्नर छैला (काल्पनिक नाम) से बात करने पर उसने बताया कि सुबह ८ बजे से रात ८ बजे तक  ट्रेनों में पैसा लेने का काम चलता है। तकरीबन १२ घंटे में ८ ट्रेनों से लाख रू0 के आस-पास प्रतिदिन के हिसाब से महीने में लाखों के वारे-न्यारे कर रहे हैं ये  किन्नर।&lt;br /&gt;अगर कोई इन्हें देखकर ट्रेन में सोने का बहाना भी कर लेता है। तो बस पूछिये मत तुरंत ये पैसा वसूलने के लिए अभद्रता और अश्लीलता की किसी भी हद से गुजर जाते हैं। बताया जाता है कि सालों से चल रहे किन्नरों के इस गोरखधंधे का मेन कारण  आर0पी0एफ0 तथा जी.आर.पी. से लेकर टी.टी. सहित रेल अधिकारियों की सांठगांठ है। सभी का हफ्ता बंधा हुआ है।&lt;br /&gt;जाहिर सी बात है कि ऐसे माहौल में कोई ठोस कदम रूपए की  चाहत तले उठने से पहले ही दब कर रह जाते हैं। ऐसे हाल देख लोगों का तो कहना यही है कि &lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;"न बाबा न ट्रेनों व बसों के बजाए निजी वाहन से सफर करना समझदारी का &lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;काम&lt;/span&gt;&lt;span style="color: rgb(51, 102, 255);"&gt;  है"। &lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-1702822431621341832?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1702822431621341832'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1702822431621341832'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/08/blog-post_07.html' title='किन्नरों से न उलझना , वरना होगा पड़ेगा शर्मसार'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJs2naeSFPI/AAAAAAAAAYQ/mccn7qhkwVI/s72-c/kinnar.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-416282157209644948</id><published>2008-08-01T05:57:00.000-07:00</published><updated>2008-08-01T06:04:33.020-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='आई बी एन ख़बर से साभार'/><title type='text'>सतयुग की प्रेम-निशानी पत्थर</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SJMIthdlsvI/AAAAAAAAAR0/vBeeqW9SKCw/s1600-h/0723two248.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SJMIthdlsvI/AAAAAAAAAR0/vBeeqW9SKCw/s320/0723two248.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5229533170476888818" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;b&gt;सोनभद्र।&lt;/b&gt; &lt;span&gt;उत्तर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रदेश&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सोनभद्र&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जिले&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सोन&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नदी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;के&lt;/span&gt; &lt;span&gt;किनारे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;खड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;बीर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;लोरिक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;का&lt;/span&gt; &lt;span&gt;पत्थर&lt;/span&gt; &lt;span&gt;सतयुग&lt;/span&gt; &lt;span&gt;की&lt;/span&gt; &lt;span&gt;एक&lt;/span&gt; &lt;span&gt;प्रेम&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कथा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;को&lt;/span&gt; &lt;span&gt;अपने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;में&lt;/span&gt; &lt;span&gt;समेटे&lt;/span&gt; &lt;span&gt;है।&lt;/span&gt;&lt;p class="storytxt" style="margin-top: 0px;"&gt; &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;कहानी है कि इस नदी के किनारे सतयुग में अगोरी नाम का एक राज्य था। उस राज्य के राजा का नाम मोलागत था। मोलागत वैसे तो बहुत अच्छे राजा थे लेकिन उनके ही राज्य में रहने वाला मेहरा नाम का एक यादव युवक उन्हें पसंद नहीं आता था। क्योंकि मेहरा बलशाली था। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;राजा की हुकूमत की उसे परवाह नहीं थी औऱ अपने इलाके में उसकी अपनी हुकूमत चलती थी।राजा हमेशा मेहरा को फंसाने की तरकीब खोजते रहते थे। एक दिन उन्होंने मेहरा को जुआ खेलने की दावत दी। प्रस्ताव ये रखा गया कि जुए में जो जीतेगा वही इस राज्य पर राज करेगा। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मेहरा ने राजा के प्रस्ताव को मान लिया। जुआ शुरू हुआ। राजा को उम्मीद थी कि वो जीत जाएंगे। लेकिन ऐसा होता नहीं है। एक एक कर राजा सबकुछ हारने लगते हैं। और एक वक्त वह भी आता है जब राजा सबकुछ हार जाते हैं। शर्त के हिसाब से राजा को अब अपना राज पाट छोड़ना है। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;राज पाट छोड़कर वो पश्चिम दिशा की ओर निकल पड़ते हैं। राजा की ऐसी दुर्दशा देखकर भगवान ब्रह्मा साधु के वेश में उनके पास आते हैं और कुछ सिक्के देकर कहते हैं कि जाओ एक बार जुआ खेलो तुम्हारा राज-पाट वापस हो जाएगा।&lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;राजा ऐसा ही करते हैं। इस बार मेहरा हारने लगता है। वह छह बार हारता है। अब उसके पास हारने के लिए कुछ भी नहीं बचा है। पत्नी को भी हार चुका है। लेकिन उसकी पत्नी गर्भवती है। और सातवीं बार वो अपनी पत्नी का गर्भ भी हार जाता है। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;बड़ी विचित्र बात है। लेकिन राजा उदारता दिखाते हैं। कहते हैं कि अगर बेटा हुआ तो अस्तबल में काम करेगा। अगर बेटी हुई तो उसे रानी की सेवा में नियुक्त कर दिया जाएगा। हारा हुआ मेहरा कुछ नहीं कर पाता। लेकिन कहानी यहां एक अजीब मोड़ पर आती है। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मेहरा के सातवीं संतान के रूप में एक बड़ी ही अद्भुत बच्ची का जन्म होता है। नाम रखा जाता है मंजरी। राजा को जब पता चलता है तो वो मंजरी को लिवाने के लिए सिपाही को भेजते हैं। पर मंजरी की मां उसे भेजने से मना कर देती है। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मंजरी की मां राजा को संदेश भिजवाती है कि जब मंजरी की शादी हो जाएगी तो उसके पति को मारकर मंजरी को ले जाना। राजा ये बात मान लेते हैं। देखते ही देखते मंजरी जवान भी हो जाती है। फिर माता पिता को उसकी शादी की चिंता सताने लगती है। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मंजरी को पता है कि उसका वर कौन है। वो कौन है जो शादी के बाद राजा को हरा सकेगा। मंजरी अपने मां बाप से कहती है कि आप लोग बलिया नाम की जगह पर जाओ। वहां लोरिक नाम का एक नौजवान मिलेगा। उससे मेरे जन्मों का नाता है और वही राजा को हरा भी सकेगा। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मंजरी के पिता लोरिक के घर जाते हैं और दोनों का रिश्ता तय हो जाता है। लोरिक डेढ़ लाख बारातियों को लेकर मंजरी से शादी करने निकलता है। सोन नदी के इस किनारे आता है लेकिन राजा अपने सैनिकों के साथ उससे लड़ने पहुंच जाते हैं। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;युद्ध में लोरिक हारने लगता है। मंजरी एक असाधारण लड़की है। वो लोरिक के पास जाती है। उससे कहती है कि अगोरी के इस किले के पास ही गोठानी नाम का एक गांव है। वहां भगवान शिव का एक मंदिर है। तुम जाओ भगवान की उपासना करो। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;इस युद्ध में जीत तुम्हारी ही होगी। लोरिक जीतता है। दोनों की शादी होती है। मंजरी की विदाई हो जाती है। लेकिन गांव की दहलीज छोड़ने से पहले वो लोरिक से कहती है कि कुछ ऐसा करो जिससे यहां के लोग याद रखें कि लोरिक और मंजरी कभी इस हद तक प्यार करते थे। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;लोरिक कहता है कि बताओ ऐसा क्या करूं जो हमारे प्यार की तो निशानी बने ही, प्यार करने वाला कोई भी जोड़ा यहां से मायूस नहीं लौटे ।  &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मंजरी ने लोरिक को एक पत्थर दिखाते हुए कहा कि इसे तलवार के एक ही वार से काट दो। लोरिक ने ऐसा ही किया। पर एक नई समस्या आ गई। पत्थर तो दो टुकड़ों में हो गया। लेकिन उसका एक हिस्सा पहाड़ से नीचे गिर गया। &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;मंजरी ने कहा कि पत्थर को ऐसे काटो कि उसके दोनों हिस्से एक ही जगह पर खड़े रहें। लोरिक ने ऐसा ही किया। और ये पत्थर जमाने से यहीं खड़े हैं ।&lt;/p&gt;&lt;br /&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;कहते हैं तब से ही &lt;span&gt;प्यार&lt;/span&gt; &lt;span&gt;करने&lt;/span&gt; &lt;span&gt;वाला&lt;/span&gt; &lt;span&gt;कोई&lt;/span&gt; &lt;span&gt;भी&lt;/span&gt; &lt;span&gt;जोड़ा&lt;/span&gt; &lt;span&gt;यहां&lt;/span&gt; &lt;span&gt;से&lt;/span&gt; &lt;span&gt;मायूस&lt;/span&gt; &lt;span&gt;नहीं&lt;/span&gt; लौटता है । &lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;तो भैये अगर तुम्हारी भी कोई अधूरी  प्रेम कहानी है तो जाओ सोनभद्र .........&lt;br /&gt;&lt;/p&gt;&lt;p class="storytxt"&gt;            &lt;/p&gt;         &lt;div class="vSpacer10"&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-416282157209644948?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/416282157209644948'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/416282157209644948'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/08/blog-post.html' title='सतयुग की प्रेम-निशानी पत्थर'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SJMIthdlsvI/AAAAAAAAAR0/vBeeqW9SKCw/s72-c/0723two248.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-1012354130554646413</id><published>2008-07-29T00:38:00.000-07:00</published><updated>2008-07-29T00:59:11.580-07:00</updated><title type='text'>एक टेंट, मशीन, चार होमगार्ड तैयार हो गया लुटाई केन्द्र</title><content type='html'>&lt;div style="text-align: center;"&gt;&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SI7M9pEuYXI/AAAAAAAAAPg/7rAqK5r3FQk/s1600-h/2008050659780401.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 10px 10px 0pt; float: left; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SI7M9pEuYXI/AAAAAAAAAPg/7rAqK5r3FQk/s320/2008050659780401.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5228341576793481586" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);font-size:100%;" &gt;प्रदूषण कैम्पों का खेल&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/div&gt;&lt;span style="font-weight: bold;"&gt;शहर&lt;/span&gt; पुलिस अपराधों को काबू कर पाए या न कर पाए लेकिन कोर्ट के आदेश, उच्चाधिकारियों के फरमान और  जनप्रतिनिधियों की मांग को दरकिनार करते हुए प्रदूषण के नाम पर दोपहिया वाहन चालकों का उत्पीडऩ जरूर कर रही है। उन्हें भारी प्रदूषण फैला रहे टैंपुओं का, नगर बसों, लोडर व ट्रकों का काला गुबार छोड़ता धुआं नहीं दिखता बस दोपहिया वाहन चालक ही प्रदूषण फैलाते दिखते हैं । शहर भर में दोहिया वाहनों के प्रदूषण की जाँच के शिविर लगे हैं जबरन चेकिंग न करने के आदेश के बाद भी कैंप संचालक जबरन वाहन चेकिंग के नाम पर उगाही कर रहे हैं। इस काम में पुलिस के सिपाही व होमगार्डों का प्रयोग किया जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;प्रदूषण बोर्ड निजी क्षेत्र में वाहन चेकिंग के लिए अनुमति देता है। शहर के कई लोगों ने इसके लिए लाइसेंस प्राप्त कर लिया है। इसकी आड़ में वाहन  चालकों का शोषण किया जाता है। सवारियों से अभद्रता आम बात है। गौरतलब है कि शासन व प्रदूषण बोर्ड जब ऐसी एजेंसी को वाहन चेकिंग का लाइसेंस देता है तो उसमें साफ निर्देश होता है कि वाहन स्वामी ऐच्छिक रूप से वाहन के प्रदूषण की जाँच कराएंगे उसके एवज में उन्हें शुल्क देना होगा कैंप से प्रदूषण  मुक्त का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। लेकिन प्रमाण-पत्र देने वाले यह लोग एक टेंट में मशीन रखकर इलाकाई पुलिस व होमगार्ड के जरिए जबरन वाहनों को रूकवा कर प्रदूषण चेक करते हैं। कई बार इसको लेकर झगड़ों की नौबत तक आ चुकी है।&lt;br /&gt;एस0पी0 ट्रैफिक ने भी जबरन चेकिंग न किए जाने का आदेश दिया था। पर मरे कम्पनी पुल के नीचे, सी।ओ.डी. क्रासिंग, लालबंगला, लखनऊ हाइवे, फजलगंज, रावतपुर, चुन्नीगंज, विजयनगर, जूही आदि जगहों पर अक्सर ऐसे कैम्प लगे दिखाई देते  हैं। जबकि शहर में सर्वाधिक प्रदूषण सरकारी वाहन व टैम्पो फैला रहे हैं। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती और  प्रदूषण चेकिंग के नाम पर दुपहिया वाहन चालकों से अभद्रता की जा रही है।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-1012354130554646413?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1012354130554646413'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1012354130554646413'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/blog-post_29.html' title='एक टेंट, मशीन, चार होमगार्ड तैयार हो गया लुटाई केन्द्र'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SI7M9pEuYXI/AAAAAAAAAPg/7rAqK5r3FQk/s72-c/2008050659780401.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-4680486255668251331</id><published>2008-07-27T00:53:00.000-07:00</published><updated>2008-07-27T01:33:59.770-07:00</updated><title type='text'>जो थे वो बन्द हो गये और नये लगाने नहीं देगें</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SIwr3Nw9ATI/AAAAAAAAAPA/HrO1OSBCl1U/s1600-h/business-school.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer; width: 222px; height: 166px;" src="http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SIwr3Nw9ATI/AAAAAAAAAPA/HrO1OSBCl1U/s320/business-school.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5227601495058088242" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;नये उद्योग &lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;हेतु&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);"&gt; १६ एन0ओ0 सी0  आवश्यक,&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;व्यापारी को दुधारू गाय समझते हैं सरकारी क&lt;/span&gt;&lt;span style="font-weight: bold; color: rgb(255, 0, 0);"&gt;र्मचारी&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;        &lt;span style="font-weight: bold;"&gt;प्रदेश&lt;/span&gt; में सत्ता संभाल रही बसपा की सरकार भले ही पूरे प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने की बात करे परन्तु प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक केन्द्र रहा कानपुर आज उद्योग धन्धों के मृतप्राय: होने के कारण उद्योगहीन होता जा रहा है। कानपुर में दिनों दिन बढ़ती बेरोजगारों की जमात सरकार के दाँवों को खोखला साबित कर रही है।  कानपुर में नौकरी की स्थिति बेहद खराब है। सरकारी नौकरी तो अब वैसे भी अलादीन का जिन्न ही दिला सकता है और प्राइवेट नौकरियों में तनख्वाह इतनी कम मिलती है कि दाल रोटी चलाना भी मुशकिल है। युवा अगर व्यापार करने की सोचें तो उसमें भी इतने बवाल हैं कि बस पूछिये मत। अगर कोई उद्योग लगाना चाहे तो उसे १६ विभागों से अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेना पड़ता है जिनमें जिला उद्योग केन्द्र केसको, व्यापार कर, कारखाना अधिनियम, प्रदूषण बोर्ड, अग्रि शमन, श्रम विभाग व नगर निगम आदि शामिल है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अगर उद्यमी कोई उद्यम लगाने की हिम्मत कर भी ले तो उसे पहले प्रोजेक्ट रिपो्र्ट बनानी होगी फिर जमीन की व्यवस्था, फिर धन के लिए ऋण और केस्‍को से बिजली कनेक्शन तो लेना ही पड़ेगा। इतनी समस्याओं के बाद अभी भी वो चैन की सांस नहीं ले पायेगा। उत्पादन शुरू करने से पहले उसे उपरोक्त १६ अनापत्ति प्रमाण-पत्र हासिल करने पड़ते हैं।&lt;br /&gt;वैसे कहने को तो जिला उद्योग केन्द्र में एकल मेज की व्यवस्था करी गयी है ताकि किसी नये उद्यमी को दिक्कतें न आयें परन्तु इसके बावजूद उद्यमी को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं क्योंकि ज्यादातर नोडल अफसर आवेदन पत्रों में कोई न कोई कमी निकाल कर अस्वीकृत कर देते हैं। उत्पादन प्रारम्भ होने से पहले ही उसे इतना हतोत्साहित कर देते हैं कि वो थक कर बैठ ही जाता है।&lt;br /&gt;किसी तरह कारोबार प्रारम्भ कर भी दिया तो उसके बाद कानून, सरकारी नौकर, गुण्डे और पुलिस मिल कर व्यापारी को दुधारू गाय समझ लेते हैं और चारों तरफ से घेर कर मूसना शुरू कर देते हैं। अब बताइये ऐसे माहौल में व्यापार पनपे तो कैसे। बड़ा व्यापार तो छोडिय़े आप अपने घर में एक छोटी सी गुमटी खोल कर देखिए नगर निगम, केस्को और व्यापार कर वाले आपका जीना न हराम कर दें तो कहियेगा। अगर ऐसा हो माहौल रहा तो उ0प्र0 को बिहार बनने में कुछ ही समय लगेगा। सरकार को अपनी नीतियों में शीघ्र ही सुधार लाना होगा वरना हमारी युवा शक्ति गलत कार्यो की ओर मुड़ जायेगी और प्रदेश में अपराध व अपराधियों की भरमार होगी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-4680486255668251331?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4680486255668251331'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/4680486255668251331'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/00.html' title='जो थे वो बन्द हो गये और नये लगाने नहीं देगें'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SIwr3Nw9ATI/AAAAAAAAAPA/HrO1OSBCl1U/s72-c/business-school.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-8951269688475743928</id><published>2008-07-13T03:26:00.000-07:00</published><updated>2008-07-13T11:32:31.707-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='- गुरूदेव श्री Shalendra चिंतक द्वारा'/><title type='text'>एक पाती श्री श्री १००८ - लुटेरानंद के नाम</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHndWDgoIZI/AAAAAAAAAJs/7B4FaFCLu20/s1600-h/Corrupt_Traffic_Cop_Cartoon.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer; width: 246px; height: 365px;" src="http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHndWDgoIZI/AAAAAAAAAJs/7B4FaFCLu20/s320/Corrupt_Traffic_Cop_Cartoon.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5222448613881815442" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;हे अनाम, अदृश्य अनंत परमशक्तिमान जरायम शिरोमणि।&lt;br /&gt;अभिवादन के लिए शब्दकोश में अलंकरण हेतु शब्द नहीं&lt;br /&gt;दद्दा। अपने शहर में जो लूट की  धाराबहाई वह ऐसी बही कि सारा शहर आपका मुरीद हो गया। यहां तक बदनाम, नकाबिल, परमभ्रष्ट अभद्र कही जाने वाली पुलिस भी आपके सामने नतमस्तक है। आपके प्रताप के आगे पिकेट का क्रिकेट दूर जा गिरा, एसओजी 'एस ए डी' बन गई। बडे कप्तान बेचारे माहततों की 'लूट भक्ति के सम्मोहन के जाल को तोड़ नहीं पा रहे हैं। आपके कारनामों से सारा शहर अभिभूत है। पुलिसवालों ने चिट्टियाँ भेज कर आपकी तेज तर्रारी भरे दुस्साहस के कसीदे गढे हैं। उनकी अपनी मजबूरियां हैं। बेचारों ने अपना दर्द भी बयां किया है, उम्मीद है आप गौर फरमाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;भइया लुटेरानन्द जी महाराज नमस्ते ,&lt;br /&gt;आशा है आप कुशल मंगल से होगें अब तो जनता हमलोगों से आपके बीच रिश्तेदारी जोड़ रहे हैं। समझ गए होगे, मौसी के पुत्तर। अमां भाई हद कर दी आपने। बिल्कुल आफरीदी इस्टाइलं में बौलिंग हो रही है। कम से कम हमारी नौकरी का ख्याल करो। सुबह-सुबह कप्तान साहब दौड़ाते हैं, बाकी टाइम आप। हम लोगों की बहुत बदनामी हो रही है। कुछ नामुराद तो आपका पार्टनर बता रहे हैं। खामखां बदनाम हो रहें हैं। बोहनी तक को तरस रहे हैं। एक तुम हो इतने बेवफा जरा भी ख्याल नहीं कर रहे हो। जब बदनामी की चादर ओढ़ी है तो लूट की गंगा में डुबकी क्यों न लगाऊँ? कुछ दिन के लिए तुम भी भइया बाहर का विजिट कर आओ, बजट भी बढिय़ा होगा, इधर खूब कूट भी दी थी। नाक कटने की नौबत आए तो द्रौपदी की पुकार पर हमारे 'छलिया' आ जरूर जाना वरना खाकी उतरते देर न लगेगी। 'तेरा मेरा साथ अमर फिर क्यों मुझको लगता है डर'&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;आ भी जा , आ भी जा , बेवफा आ भी जा&lt;br /&gt;पकडा न जा तो कम से कम हिस्सा तो दे जा&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-8951269688475743928?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8951269688475743928'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/8951269688475743928'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/blog-post_13.html' title='एक पाती श्री श्री १००८ - लुटेरानंद के नाम'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp3.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHndWDgoIZI/AAAAAAAAAJs/7B4FaFCLu20/s72-c/Corrupt_Traffic_Cop_Cartoon.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3188586894323142414</id><published>2008-07-12T21:36:00.000-07:00</published><updated>2008-07-12T21:51:57.204-07:00</updated><title type='text'>छात्रों के सपनों को लूट रहे कोचिंग संचालक</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmIlYfABpI/AAAAAAAAAJY/k3BfKAmvoKU/s1600-h/iasaspirants.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmIlYfABpI/AAAAAAAAAJY/k3BfKAmvoKU/s320/iasaspirants.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5222355418721814162" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span&gt;&lt;/span&gt;उम्र यहीं कोई १८-१९ साल कपड़े जींस और टीशर्ट कन्धे पर बैग लगभग यही हुलिया हर कोचिंग पढऩे वाले छात्र का होता है। आंखें में सुनहले सपने सजाये इन युवकों के सपनों को अपना व्यापार बनाने वाले कोचिंग संचालक इनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के साथ-साथ इनका आर्थिक शोषण भी कर रहे हैं। काकादेव में कुकुर मुत्ते की तरह उग आये इन कोचिंगों में पढ़ाने वाले क्या खुद इस काबिल हैं कि वो इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा पास कर सकें। इन कोचिंगों का इतिहास बहुत पुराना नहीं है। सन १९९० तक शहर में कोचिंगों का इतना प्रचार प्रसार नहीं था तब यहाँ मात्र तीन कोचिंग क्लासेज हुआ करतीं थी आई0आई0टी0 सरकिल, अहसा ओर प्रान क्लासेज। सन ९५ तक इन्हीं तीनों ने शहर पर राज किया। इन कोचिंगों में प्रवेश भी आसानी से मिल जाता था और बैच में छात्रों की संख्या भी १५-२० रहती थी। इनको चलाने वाले संचालक इण्टर की क्लासेज भी पढ़ाते थे और ज्यादातर शिक्षक हुआ करते थे। आई0आई0टी0 सरकिल के सरिल फरटेडो के अमरीका चले जाने के बाद ये सभी लगभग बन्द होने लगीं थी तभी ९५ में अजय ने काकादेव मण्डी में प्रवेश किया और फिजिक्स पढ़ाना शुरू किया। अजय के पीछे-पीछे ही पंकज अग्रवाल, राजकुशवाहा भी मण्डी पहुँच गये। इस तरह ९६ से काकादेव बाकायदा कोचिंग मण्डी कहलाने लगा और इसी के साथ शुरू हुई प्रतिस्पर्धा की वो जंग जो आज भी बदस्तूर जारी है। सन २००० तक काकादेव में २५-३० नामी गिरामी कोचिंग खुल चुकी थी। बाहर से आने वाले छात्रों के लिये हास्टल खुलने लगे थे और खाने के लिये टिफिन सर्विस प्रारम्भ हो गयी थी।  यही वो समय था जब इन कोचिंगों में एडमीशन के लिये मारामारी शुरू हुई। संचालाकों ले छात्रों को लुभाने के लिये विज्ञापन देने प्रारम्भ कर दिये थे। जगह-जगह दलालों ने अपना जाल फैला रखा था और छात्र शिक्षक का नाता एक व्यवसाय में तब्दील हो चुका था। शहर के अन्य हिस्सों में पढ़ा रह बबोल मुखर्जी, ए0के0 सिंह जैसे शिक्षक भी काकादेव आ गये थे। पहले कोचिंग पढाने वाले या तो बीटेक होते थे या पेशे से अध्यापक पर अब ज्यादातर संचालकों ने बीएससी पास लडक़ों से ही काम चला रखा है।&lt;br /&gt;ये बच्चों का क्या भविष्य बनायेगें ये तो प्रभु ही जाने पर इन कोचिंग वालों का बैंक बैलेंस हर साल दुगना होता जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं रोजाना अखबारों में छपने वाले लाखों के विज्ञापन ज्यादातर झूठ पर आधारित होते हैं। जो &lt;span&gt;&lt;/span&gt; किसी प्रतियोगिता परीक्षा में चुन लिया गया उसे पैसे देकर अपनी कोचिंग का छात्र बताया जाने लगता है। कभी कभी तो एक ही छात्र का फोटो कई कोचिंग वाले छपवा देते  इतना ही होता तो भी गनीमत थी पर ये कोचिंग संचालक प्रतिस्पर्धा करते करते ईष्र्या द्वेष और घात प्रतिघात पर उतर आये हैं। आज छात्र को यहाँ सिवाए शोषण के कुछ प्राप्त नहीं हो रहा है। एक क्लास में २००-५०० तक बच्चे होते हैं और टीचर माइक लगा कर पढ़ाता है जो बच्चे की समझ में नहीं आता, इसके बाद मिलती हैं डाटा शीट जिस पर चन्द सवाल और उनके जवाब होते हैं, इस पर फीस होती है ५० हजार। ये छात्रों का शोषण नहीं तो और क्या है। इस तरह भ्रामक प्रचार करक छात्रों को लुभाना फिर उनके भविष्य से खिलवाड़ करना कहां तक जायज है।&lt;br /&gt;अभिभावकों को अपने बच्चे को कोचिंग कराने से पूर्व कोचिंग के विषय में पूरी जानकार कर लेनी चाहिये वरना उनका पैसा तो बरबाद होगा ही बच्चे का भविष्य भी चौपट हो जायेगा।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3188586894323142414?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3188586894323142414'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3188586894323142414'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/000-000-00.html' title='छात्रों के सपनों को लूट रहे कोचिंग संचालक'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmIlYfABpI/AAAAAAAAAJY/k3BfKAmvoKU/s72-c/iasaspirants.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-1053330170998257247</id><published>2008-07-12T21:27:00.000-07:00</published><updated>2008-07-12T21:34:17.902-07:00</updated><title type='text'>पुलिस के नाम पर दे दे बाबा...</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmFvOyVo1I/AAAAAAAAAJQ/nQ62pn0WHqU/s1600-h/993733044_5e5395f5b4.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmFvOyVo1I/AAAAAAAAAJQ/nQ62pn0WHqU/s320/993733044_5e5395f5b4.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5222352289382376274" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;स्थान : गोविंदपुरी रेलवे स्टेशन  कानपुर&lt;br /&gt;समय : सुबह ११ बजे&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दृश्य एक : छुक-छुक करती ट्रेन आई। भीड़ का आलम। सबको जल्दी, किसी को ट्रेन से उतरने की तो किसी को चढऩे की। स्टेशन पर कुछ सवारियां कैरियर की तरह माल ढोने वाली थीं। सहसा एक १२-१३ साल का किशोर तेजी से लपकता हुआ प्लेटफार्म पर आया। बेतरतीब बाल, आंखों में कीचड़, फटे पुराने कपड़े, हाथ में एक डिब्बा। पहली नजर में ही भिखारी लग रहा था।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दृश्य दो :  लडक़ा फुर्ती से दूध वालों, वेण्डरों व ट्रेन में सामान बेचने वालों के पास जाता और वे लोग दस-बीस के नोट डालते गए। ट्रेन से उतरने वाले कैरियर (माल लाने-ले जाने वाले) मुस्करा कर उसके डिब्बे में नोट डालते निकल लेते। सामने खड़े मुच्छड़ जीआरनपी वालों की आंखों की चमक बढ़ती जा रही थी। दस मिनट में लडक़े ने ४००-५०० रुपये समेट लिए होंगे। दृश्य तीन : एक सेठ जी काफी सामान लिए उतरे। लडक़ा पास गया। सेठ ने हिकारत की नजरों से देखा। सोचा कोई भिखारी होगा। लडक़े ने कान में कुछ कहा तो सेठ ने डपट दिया। लडक़े ने अपने आका को पुकारा। दो खादीपोश तुरंत प्रकट हुए। सिपाहियों ने व्यापारी की जैसे ही तलाशी लेनी शुरू की, बेचारा सरेण्डर हो गया। पहली बार फंसा था, सो पूरा एक खजूर छाप देना पड़ा। फुटकर १० का अलग से लडक़े को देना पड़ा। विजयी मुद्रा में किशोर आगे बढ़ गया। ट्रेन जा चुकी थी। मेरी ट्रेन लेट थी। भीड़ छंट चुकी थी।  डिब्बे वाले लडक़े के प्रति मेरी दिलचस्पी बढ़ गयी। क्योंकि वह भिखारी नहीं था। सालिड रकम बिना रिरियाए व गिड़गिड़ाए मिल रही थी। एक रुपया अठन्नी को देते आदमी बुदबुदाता है। मैंने लपक कर उससे पूछा बेटा ये कौन सा गोरखधंधा है? तुम अपने बारे में बताओ। अंकल, क्‍यों धंधा खोटी कर रहे हो, अपना रास्ता नापो मेरे पीछे सीआईडी करोगे तो निपट जाओगे। बड़ी धृष्टता से उसने जवाब दिया। मैं भी हार मानने वाला नही था। पीछे पड़ ही गया। तो उसने बताया यहां दो नम्बर का माल उतरता है, अवैध तरीके से वेण्डर सामान बेचते हैं। दूध वाले पानी मिलाते हैं। भला जब अकेले ही कमाकर माल जीम रहे हैं, बिना दद्दा (जीआरपी) को समझे कैसे धंधा कर पाओगे? कभी आप भी माल लाना, हम मामला सुलटवा देंगे। अपुन की भी रंगबाजी है, लालू कहते हैं हमें, एक रेल का मंत्री तो मैं रेल  से वसूलने का मंत्री। तभी सिपाही आए, डिब्बे के रुपये गिने। २० रुपये लालू को दिए। लालू ने मसाला फाड़ा, मुंह में डाला।  थोड़ी देर बाद सिगरेट के छल्ले निकाल वह कानून को धुएं में उड़ाता दिखा। दूसरी गाड़ी  के इंतजार में उसकी आंखें दूर तक निगहबानी करती दिखीं। पुलिस वसूली के इस नायाब तरीके पर चिंतन कर ही रहा था कि ट्रेन ने तन्द्रा तोड़ दी।&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-1053330170998257247?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1053330170998257247'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/1053330170998257247'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/blog-post_2599.html' title='पुलिस के नाम पर दे दे बाबा...'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHmFvOyVo1I/AAAAAAAAAJQ/nQ62pn0WHqU/s72-c/993733044_5e5395f5b4.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3929052076047169136</id><published>2008-07-12T21:09:00.000-07:00</published><updated>2008-07-13T11:45:14.996-07:00</updated><title type='text'>श्रमिक बस्तियों की दुर्दशा, जिम्मेदार कौन ?</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp2.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHpNKTqxu0I/AAAAAAAAAKM/QzBKa_F4NZ4/s1600-h/ct.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://bp2.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHpNKTqxu0I/AAAAAAAAAKM/QzBKa_F4NZ4/s320/ct.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5222571557363235650" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=""&gt;    कानपुर । प्रदेश के श्रमिकों को सर छुपाने की छत उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा 1952 में केन्द्र से सहायता प्राप्त कर औद्यौगिक आवास योजना लागू करी गयी थी । इस योजना का उद्देश्य था प्रदेश के विकास हेतु निरन्तर प्रयत्नशील  &lt;span&gt;श्रमिकों को&lt;/span&gt; कम किराये पर आवास उपलब्ध कराना,परन्तु सरकार की अनेक अन्य योजनाओं  की तरह ही यह योजना भी अपने मूल उद्देश्य से भटक गयी और बसायी गयीं सभी श्रमिक बस्तियाँ आज बदहाली अवैध कब्जों और कुव्यवस्था का शिकार हैं।&lt;br /&gt;  ज्ञात हो कि इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश के विभिन्न 16 नगरों में 37 श्रमिक बस्तियाँ बसायी गयीं थीं, जिनमें 30,643 घरों का निर्माण किया गया था, इनमें एक कमरे वाले कुल 24,751 मकान और दो कमरे वाले 4,836 मकान बनाये गये थे । इनका किराया काफी कम रख्खा गया था, अधिकतम किराया था 30रु प्रतिमाह । परन्तु आज सभी श्रमिक बस्तियाँ अनाधिकृत कब्जेदारी की समस्या से ग्रस्त हैं, ऐसा नहीं है कि सरकार ने इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किया परन्तु जैसा हमेशा होता आया है इस बार भी इस सम्बन्ध में जारी किया गया शासनादेश सं03265/36-4-90-7/89 दिनांक 29,11,1990 भी मात्र एक कागज का टुकडा बन कर रह गया।&lt;br /&gt;  प्रदेश की औद्यौगिक राजधानी कहलाने वाले हमारे कानपुर में सबसे अधिक 18015 श्रमिक आवासों  का निर्माण किया गया था,परन्तु पिछले दिनों सरकार द्वारा कराये गये एक सर्वेक्षण में श्रमिक बस्तियों में अनाधिकृत रहने वालों की सबसे बडी संख्या भी कानपुर में ही है, कानपुर में इस समय सरकारी आकंडों के हिसाब से इन बस्तियों में 7143 मकानों में अवैध लोग रह रहे हैं। ये बस्तियाँ अब मंहगे इलाके में हैं और श्रमिकों द्वारा भी प्रलोभनवष या अन्य कारणों से इन घरों को दूसरों को बेच दिया गया है और दिन पर दिन यहाँ अवैध रुप से रहने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है जिसका एक कारण ये भी है कि पिछले 7 वर्षो से यहाँ नियमितीकरण या आवंटन की कोई प्रक्रिया नहीं हुयी है, जबकि श्रमिक बस्तियों के कार्य हेतु श्रम विभाग द्वारा 600 कर्मचारी नियुक्त हैं।&lt;br /&gt;   इन श्रमिक बस्तियों में ज्यादातर घरों में भूतल पर अवैध निर्माण भी कराया गया है और घरों का व्यवसायिक उपयोग धडल्ले से हो रहा है। जो वास्तव में श्रमिक हैं और इन बस्तियों में रहने को अधिकृत है उनके घरों की हालत बेहद दयनीय है छतें कमजोर हैं, दीवारें जरजर हैं और श्रम विभाग का इस और पिछले 7 सालों से कोई ध्यान नहीं गया है। इन घरों की खस्ता हालत के चलते किसी भी दिन कोई भयानक हादसा हो सकता है।ज्ञात हो कि इन बस्तियों में रहने वाले अनाधिकृत किरायेदारों के खिलाफ ‘‘अप्रधिकृत अध्यासियों की बेदखली अधिनियम 1972 ’’ के तहत कार्यवाही पिछले 15 सालों से जारी है पर आज तक एक भी अनाधिकृत किरायेदार को निकाला नहीं जा सका है और इन अवैध निवासियों के कारण किराया वसूली पर भी दुष्प्रभाव पडा है। सरकारी आंकडों के हिसाब से इन अनाधिकृत करायेदारों पर 3 करोड 50 लाख रु किराया बाकी है, जबकि सभी मकानों पर गृहकर का भुगतान श्रम विभाग करता है जो कि तकरीबन 10 लाख रु साल होता है।&lt;br /&gt;  श्रमिक बस्तियों की दुर्दषा के कारण चाहे जो रहे हों पर आज यह बस्तियाँ श्रम विभाग का सफेद हाथी बनी हुयी हैं। सरकार द्वारा इनको बेचने पर विचार भी किया गया, पर इस पर आज तक अमल नहीं हो सका है। श्रम विभाग के पास न तो इतने साधन हैं और न ही अधिकारियों के पास कुछ करने की फुर्सत अतः मामला हमारे देश  की तरह ही राम भरोसे चल रहा है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style=";font-family:Chanakya;font-size:18;"  &gt;&lt;/span&gt;&lt;span style=";font-family:Chanakya;font-size:18;"  &gt;&lt;/span&gt;  &lt;p style="text-align: left;" class="MsoNormal"&gt;&lt;span style=";font-family:Chanakya;font-size:18;"  &gt;&lt;o:p&gt;&lt;br /&gt;&lt;/o:p&gt;&lt;/span&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3929052076047169136?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3929052076047169136'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3929052076047169136'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/blog-post_12.html' title='श्रमिक बस्तियों की दुर्दशा, जिम्मेदार कौन ?'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp2.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SHpNKTqxu0I/AAAAAAAAAKM/QzBKa_F4NZ4/s72-c/ct.jpg' height='72' width='72'/></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-7649880439385799219.post-3025518986621104099</id><published>2008-07-05T01:38:00.000-07:00</published><updated>2008-07-05T01:43:44.364-07:00</updated><title type='text'>हाय हाय महंगाई  , तू आखिर कहाँ से आई</title><content type='html'>&lt;a onblur="try {parent.deselectBloggerImageGracefully();} catch(e) {}" href="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SG80N_CoakI/AAAAAAAAAHE/Bnq5SIZMFiI/s1600-h/24mar_veg.jpg"&gt;&lt;img style="margin: 0pt 0pt 10px 10px; float: right; cursor: pointer;" src="http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SG80N_CoakI/AAAAAAAAAHE/Bnq5SIZMFiI/s320/24mar_veg.jpg" alt="" id="BLOGGER_PHOTO_ID_5219447908011108930" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;महंगाई में लगातार तेजी की आखिरकार क्या वजह है? पूरी दुनिया में खाने-पीने की चीजें महंगी हो रही हैं, इस्पात और ताम्बा जैसे धातुएं नई ऊंचाई छू रहे हैं और कच्चे तेल की कीमत में तो मानो आग ही लग गई है। आखिरकार कमोडिटी में इस भयानक तेजी की क्या वजह है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;कहीं मायूसी तो कहीं जश्न का माहौल है। अमेरिका का डाओ जोंस अपनी ऊंचाई से 20 फीसदी नीचे है, भारत का सेंसेक्स इसी साल 40 फीसदी गिर चुका है। चीन के शंघाई सूचकांक का तो हाल और भी बुरा है, यह अपने उच्चतम स्तर से 60 फीसदी से भी ज्यादा नीचे चला गया है। लेकिन कच्चा तेल इसी साल 50 फीसदी महंगा हुआ है।अनाज की कीमतें पिछले छः महीने में 50 फीसदी बढ़ी हैं, कच्चा लोहा पिछले एक साल में 70 फीसदी महंगा हुआ है। आखिर यह क्या हो रहा है?&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अमेरिकी कांग्रेस की मानें तो सारा खेल सटोरियों का है। शेयर बाजार से तो मुनाफा नहीं मिल रहा है। इसलिए सारे बड़े सटोरिये कमोडिटी वायदा में जमकर पैसा लगा रहे हैं। जहां 2003 में कमोडिटी वायदा में कुल निवेश महज 13 अरब डॉलर का था, यह 2008 के मार्च में बढ़कर 260 अरब डॉलर हो गया। यानी पांच साल में ही करीब 20 गुना बढ़ोतरी हुई है।यही वजह है कि कच्चा तेल, धातु, खाने का तेल, गेहूं, चावल, मक्का लगभग सारी वस्तुओं की कीमतों में पिछले एक साल से बेतहाशा तेजी रही है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;दुनियाभर के बाजार में सट्टेबाजी की वजह से जिन चीजों के दाम आसमान पर पहुंच गए उसने हमारी महंगाई को भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है और सरकार इसी का सहारा ले रही है कि यह आयातित महंगाई है। हमारा कोई कसूर नहीं है।&lt;br /&gt;तो भाई तुम भी कहो :- हाय हाय महंगाई .........&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/7649880439385799219-3025518986621104099?l=khulasatimes.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3025518986621104099'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/7649880439385799219/posts/default/3025518986621104099'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://khulasatimes.blogspot.com/2008/07/blog-post.html' title='हाय हाय महंगाई  , तू आखिर कहाँ से आई'/><author><name>Khulasa Times Vision</name><uri>http://www.blogger.com/profile/13626249132771648393</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='19' src='http://4.bp.blogspot.com/_sBfAl1_uFp0/SJniX6almvI/AAAAAAAAAXM/sOUbkCroecs/s1600-R/khulasatv.JPG'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://bp0.blogger.com/_sBfAl1_uFp0/SG80N_CoakI/AAAAAAAAAHE/Bnq5SIZMFiI/s72-c/24mar_veg.jpg' height='72' width='72'/></entry></feed>
